
जबलपुर। पनागर थाना क्षेत्र में पुलिस ने वन्यजीवों के शिकार की एक बड़ी साजिश को नाकाम करते हुए दो बाहरी शिकारियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों के पास से अवैध हथियार और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस अब इस मामले में हथियारों के स्रोत और आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। पनागर थाना प्रभारी विपिन बिहारी सिंह को 15 अप्रैल की देर रात गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी कि ग्राम बड़ेरा कलां के समीप स्थित जंगलों में फायरिंग की आवाजें सुनी गई हैं। सूचना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस टीम तत्काल मौके पर रवाना हुई। स्थानीय स्तर पर की गई शुरुआती पूछताछ में यह तथ्य सामने आया कि एक जीप क्रमांक केए 12 एन 4252 में सवार होकर दो युवक जंगल की ओर गए हैं और वे लगातार फायरिंग कर रहे हैं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संभावित रास्तों पर घेराबंदी शुरू की, जिसके परिणामस्वरूप संदिग्ध वाहन को रोक लिया गया।
शिकार के इरादे से जंगलों में प्रवेश
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे शिकार करने के उद्देश्य से पनागर के जंगली इलाके में आए थे। उन्होंने जंगल के भीतर कुछ स्थानों पर वन्य प्राणियों को निशाना बनाते हुए गोलियां भी चलाई थीं, हालांकि निशाना चूक जाने के कारण किसी जानवर को हानि नहीं पहुंची। पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपी सुनियोजित तरीके से शिकार की फिराक में थे और उनके पास मौजूद गोला-बारूद की मात्रा किसी बड़ी घटना की ओर इशारा कर रही है।
आरोपियों की पहचान हुई, हथियार बरामद
जीप की तलाशी लेने पर उसमें दो व्यक्ति सवार मिले, जिनकी पहचान अरुण चेंगप्पा और गार्डन पेप्टिस के रूप में हुई है। पुलिस ने जब वाहन की सघन जांच की तो उसमें से दो राइफल और बड़ी संख्या में जिंदा कारतूस बरामद हुए। पूछताछ के दौरान जब आरोपियों से हथियारों के वैध दस्तावेज और लाइसेंस की मांग की गई, तो वे कोई भी कागज प्रस्तुत करने में असमर्थ रहे। इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर हथियारों और वाहन को जब्त कर लिया।
आर्म्स एक्ट के तहत कानूनी कार्यवाही
पुलिस ने दोनों आरोपियों के विरुद्ध आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया है। थाना प्रभारी के अनुसार अब इस बात की गहराई से तफ्तीश की जा रही है कि ये अवैध राइफलें कहां से खरीदी गई थीं और आरोपियों का पूर्व में शिकार की किन-किन घटनाओं में हाथ रहा है। पुलिस को अंदेशा है कि पकड़े गए आरोपी किसी बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का हिस्सा हो सकते हैं। फिलहाल आरोपियों से विस्तृत पूछताछ जारी है, जिससे आने वाले समय में वन्यजीव अपराध से जुड़े अन्य बड़े खुलासे होने की संभावना है।
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