नई दिल्ली। पंजाब की सियासत में नया विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्यपाल से मिलकर भगवंत मान (Bhagwant Maan) को मुख्यमंत्री पद (Chief Minister post) से हटाने की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि मुख्यमंत्री का आचरण पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर कई गंभीर आरोप लगाए। जाखड़ ने दावा किया कि मुख्यमंत्री कथित तौर पर शराब के प्रभाव में शासन चला रहे हैं, जो एक संवेदनशील सीमावर्ती राज्य के लिए चिंताजनक है।
उन्होंने तर्क दिया कि जिस व्यक्ति को शराब के नशे में वाहन चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती, वह पूरे राज्य का नेतृत्व कैसे कर सकता है। भाजपा ने मांग की कि मुख्यमंत्री को पद से हटाकर उचित चिकित्सा (डी-एडिक्शन) के लिए भेजा जाए।
भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि हालिया विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री का व्यवहार अनुचित रहा और इससे प्रशासनिक व्यवस्था पर असर पड़ा। पार्टी ने राज्यपाल से आग्रह किया कि वे सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी नेतृत्व से नए नेता के चयन पर विचार करने को कहें।
इसके साथ ही भाजपा ने राज्य के प्रशासनिक माहौल को लेकर भी चिंता जताई। जाखड़ ने आरोप लगाया कि वरिष्ठ अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है और उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने में दिक्कत हो रही है। उन्होंने मुख्य सचिव को तलब कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग भी रखी।
भाजपा नेताओं ने यह भी कहा कि विधानसभा सत्र का आयोजन राजनीतिक उद्देश्य से किया गया और इसका मकसद सरकार के भीतर असंतोष को दबाना था। पार्टी का दावा है कि कुछ विधायक असंतुष्ट हैं और वे जल्द ही राजभवन का रुख कर सकते हैं।
इस मुद्दे पर जाखड़ ने अरविंद केजरीवाल और सांसद संदीप पाठक पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायकों को एफआईआर का डर दिखाकर पार्टी में बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
फिलहाल, इन आरोपों पर सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस विवाद ने पंजाब की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved