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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जेल में बंद आरोपियों से हुई पूछताछ, कबूले कई राज, बताया कैसे दिया अंजाम

July 01, 2026

अयोध्या। राम मंदिर (Ram Mandir) के चढ़ावे में करोड़ों रुपये की चोरी के मामले (Theft case) की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद पुलिस ने जिला जेल पहुंचकर गिरफ्तार आरोपियों (Accused) से करीब दो घंटे तक अलग-अलग पूछताछ की। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने चोरी की कार्यप्रणाली, दान राशि के इस्तेमाल और गणना प्रक्रिया से जुड़े कई अहम दावे किए। हालांकि पुलिस ने इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और सभी तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में सबसे अधिक समय आरोपी अविनाश मिश्रा से सवाल-जवाब में लगाया गया। बताया जा रहा है कि उसके पास से सबसे ज्यादा बरामदगी हुई थी, इसलिए पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने की कोशिश कर रही है। साथ ही जांच एजेंसियां आरोपियों की संपत्तियों, बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल कर रही हैं।

चोरी के तरीके को लेकर किए गए कई दावे
सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने पूछताछ में दावा किया कि दान राशि की गणना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की कुछ कमियों का फायदा उठाकर चोरी की जाती थी। पुलिस ने रकम निकालने, उसे छिपाने और परिसर से बाहर पहुंचाने को लेकर विस्तार से पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा का नाम भी सामने आया, लेकिन पुलिस ने इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। जांच एजेंसियां आरोपियों के बयानों का उपलब्ध साक्ष्यों से मिलान कर रही हैं।


  • ‘एक निकालता था रकम, बाकी बनाते थे घेरा’
    पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि दान राशि निकालने का काम एक व्यक्ति करता था, जबकि अन्य लोग उसके चारों ओर इस तरह खड़े हो जाते थे कि किसी को संदेह न हो। दावा है कि निकाली गई रकम को पहले मंदिर परिसर के बाथरूम में छिपाया जाता था और बाद में मौका मिलने पर बाहर ले जाया जाता था। पुलिस अब इन दावों की पुष्टि सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर कर रही है।

    कैमरों की निगरानी की थी पूरी जानकारी
    सूत्रों के अनुसार, आरोपियों को मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की लोकेशन और उनकी निगरानी व्यवस्था की पूरी जानकारी थी। इसी आधार पर चोरी की योजना बनाई जाती थी ताकि कैमरों की सीधी नजर से बचा जा सके। पुलिस अब कंट्रोल रूम की ड्यूटी, सीसीटीवी रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

    गणना कक्ष की चाबी को लेकर भी दावा
    जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पूछताछ में आरोपियों ने दावा किया कि गणना कक्ष की एक चाबी टिन्नू यादव के पास रहती थी, जबकि दूसरी बैंक कर्मियों के पास होती थी। आरोपियों के अनुसार, इसी व्यवस्था का फायदा उठाया गया। हालांकि बैंक कर्मचारियों की किसी भूमिका की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस दस्तावेजों व रिकॉर्ड के आधार पर जांच कर रही है।

    पिछले सप्ताह हुई थीं गिरफ्तारियां
    पिछले सप्ताह इस मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए टिन्नू यादव, गिनती प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव तथा अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, करुणेश और अवनीश शुक्ला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस लगातार मामले से जुड़े साक्ष्य जुटा रही है और जेल में हुई पूछताछ को जांच का महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।

    बैंक ने नोटिस का दिया जवाब
    मामले की जांच के दौरान बैंक ऑफ बड़ौदा की अयोध्या शाखा से कुछ खातों की जानकारी मांगी गई थी। बैंक ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि उसकी भूमिका केवल ऑनलाइन दान तक सीमित है। बैंक के अनुसार, क्यूआर कोड के जरिए मिलने वाली राशि सीधे बैंकिंग प्रणाली में दर्ज होती है, जबकि नकद चढ़ावे की गणना, पैकिंग और उसे बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया में बैंक की कोई भूमिका नहीं होती। सूत्रों के मुताबिक, राम जन्मभूमि ट्रस्ट को मिलने वाले कुल दान का लगभग 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा बैंक ऑफ बड़ौदा और पंजाब नेशनल बैंक के माध्यम से ऑनलाइन प्राप्त होता है, जबकि सबसे अधिक ऑनलाइन लेनदेन भारतीय स्टेट बैंक के जरिए होता है।

    बैंक खातों की भी हो रही जांच
    सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों के बैंक खातों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। इनमें महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा के खाते भी शामिल हैं। सूत्रों का दावा है कि अनिल मिश्रा ने हाल ही में एक इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए करीब 20 लाख रुपये का बैंक ऋण लिया था। हालांकि जांच एजेंसियों ने अब तक यह नहीं कहा है कि इन खातों का चोरी के मामले से कोई सीधा संबंध मिला है।

    आरोपियों के खातों का भी खंगाला जा रहा रिकॉर्ड
    पुलिस ने बैंक ऑफ बड़ौदा से आरोपी अविनाश शुक्ला, मनीष यादव और सुप्रिया मिश्रा के खातों का विवरण मांगा था। बैंक ने बताया कि अविनाश शुक्ला और मनीष यादव के नाम से खाते मौजूद हैं, जबकि सुप्रिया मिश्रा के नाम से इस शाखा में कोई खाता नहीं मिला। सूत्रों के अनुसार, मनीष यादव के खाते में फिलहाल करीब 1,400 रुपये जमा हैं और हाल के महीनों में उसमें कोई बड़ा लेनदेन दर्ज नहीं हुआ है। पुलिस अब अन्य बैंकों और वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है ताकि चोरी की रकम के संभावित लेनदेन का पता लगाया जा सके।

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