
जबलपुर। जिले में समर्थन मूल्य पर मूंग उपार्जन (खरीदी) शुरू होते ही भ्रष्टाचार और सिंडिकेट के पुराने खिलाडिय़ों ने अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। जिला प्रशासन ने इस बार मूंग खरीदी के लिए जो 10 केंद्र बनाए हैं, उनमें से सबसे संवेदनशील माने जाने वाले मझौली क्षेत्र में घोटाले का पुराना पैटर्न दोहराने की पूरी तैयारी नजर आ रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि सब कुछ जानते हुए भी वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन और जिम्मेदार अधिकारियों ने एक ऐसे वेयरहाउस को प्राथमिकता सूची में शीर्ष पर रख दिया, जिसका पूरा कुनबा पहले से ही महाघोटाले के आरोपों से घिरा हुआ है।
पाटन के साथ सौतेला व्यवहार
प्रशासन ने मझौली, सिहोरा और शाहपुरा जैसे क्षेत्रों को दो-दो केंद्र बांट दिए, पाटन जैसे विशाल कृषि बेल्ट को सिर्फ एक केंद्र दिया, और उसे भी उठाकर कटंगी फेंक दिया। इससे पाटन के किसानों को अपनी उपज कौडिय़ों के दाम बिचौलियों को बेचने या भारी परिवहन खर्च उठाने पर मजबूर होना पड़ेगा।
जांच के दायरे में आएंगे साहब?
जब 2023 के घोटाले की जांच लंबित है, तो उसी सिंडिकेट को दोबारा मौका किसके संरक्षण में मिला पाटन का केंद्र कटंगी शिफ्ट करके क्या किसी चहेते वेयरहाउस संचालक को फायदा पहुंचाने की स्क्रिप्ट लिखी गई है? क्या जबलपुर कलेक्टर इस पूरे उपार्जन नेटवर्क की निष्पक्ष जांच कराकर किसानों के हक की रक्षा करेंगे?
ईमानदार वेयरहाउस खाली, दागी को तवज्जो क्यों?
बड़ा सवाल यह है कि पिताश्री वेयरहाउस के महज 5 किलोमीटर के दायरे में कई साफ-सुथरी छवि वाले वेयरहाउस खाली पड़े हैं। इस साल मूंग का पंजीयन और आवक दोनों कम है, जिसके लिए 1000 से 2000 मीट्रिक टन की छोटी क्षमता वाले गोदाम भी पर्याप्त थे। इसके बावजूद अधिकारियों ने आखिर किस विशेष सेटिंग के तहत विवादित रूप को ही केंद्र के लिए चुना प्रशासनिक मनमानी का दूसरा अजीबोगरीब नमूना पाटन तहसील में देखने को मिला है। भौगोलिक स्थिति को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए पाटन का उपार्जन केंद्र कटंगी क्षेत्र के रुद्रास वेयरहाउस में खोल दिया गया है और इसकी जिम्मेदारी बोरिया समिति को दी गई है। सहकारिता विभाग ने जिला प्रशासन को 13 समितियों की जो सूची भेजी थी, उसमें पाटन में दो केंद्र प्रस्तावित थे।
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