
जबलपुर। शिक्षा के अधिकार और पारदर्शिता का दावा करने वाले निजी और सरकारी दावों की पोल पनागर क्षेत्र के संदीपनी स्कूल, रैपुरा में खुलती नजर आ रही है। विद्यालय की चालू सत्र की प्रवेश प्रक्रिया अब गंभीर विवादों और सवालों के घेरे में है। आरोप है कि विद्यालय प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारियों ने मिलकर शासन की तय गाइडलाइन को पूरी तरह दरकिनार कर दिया और अपात्रों को रेवडिय़ों की तरह एडमिशन बांट दिए। इस पूरे कथित एडमिशन खेल को लेकर भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ के जिला सह-संयोजक राजेन्द्र चौधरी ने सीधे कलेक्टर जबलपुर को एक लिखित और दस्तावेजी शिकायत सौंपी है। इस शिकायत के बाद क्षेत्र के स्थानीय अभिभावकों में भारी आक्रोश है और जिला प्रशासन की निष्पक्षता दांव पर लग गई है।
क्या है शासन की प्रवेश नीति और कहां हुआ उल्लंघन?
खोजी पड़ताल में सामने आया कि शासन की निर्धारित प्रवेश नीति के तहत किसी भी स्कूल में दाखिले के लिए कुछ कड़े और पारदर्शी नियम तय किए गए हैं, जिनका क्रम इस प्रकार होना चाहिए था प्रथम प्राथमिकता (लोकल) सबसे पहले विद्यालय के ठीक आसपास या उसी क्षेत्र के स्थानीय बच्चों को प्रवेश दिया जाना था। द्वितीय प्राथमिकता (नजदीकी दायरा) सीटें खाली रहने पर विद्यालय से केवल दो किलोमीटर की परिधि (रेडियस) में निवास करने वाले बच्चों को मौका मिलना था।आरोप है कि संदीपनी स्कूल रैपुरा में इन दोनों ही प्राथमिकताओं को पूरी तरह कुचल दिया गया। स्थानीय और पूरी तरह पात्र बच्चे स्कूल के चक्कर काटते रह गए, जबकि जबलपुर शहर के सुदूर और बाहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को पिछले दरवाजे से प्रवेश दे दिया गया।
आधार और समग्र आईडी को किया दरकिनार!
इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू तकनीकी और दस्तावेजी प्रमाणीकरण से जुड़ा है। आज के दौर में जहां हर सरकारी और गैर-सरकारी काम के लिए आधार कार्ड और समग्र आईडी को ही पते का अंतिम और सबसे विश्वसनीय प्रमाण माना जाता है, वहीं संदीपनी स्कूल में इसके बिल्कुल उलट हुआ। शिकायत के मुताबिक, प्रवेश के दौरान बच्चों के असली आधार कार्ड या समग्र आईडी में दर्ज आधिकारिक पते को जानबूझकर नजरअंदाज कर दिया गया। इसके बजाय, पालकों द्वारा साधारण आवेदन पत्रों में जो मनमुताबिक पते लिखकर दिए गए थे, उन्हीं को अंतिम सत्य मानकर चयन सूची जारी कर दी गई। यह सीधा-सीधा नियमों का उल्लंघन है और किसी बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
चयन सूची निरस्त हो और दोषियों पर दर्ज हो एफआईआर
कलेक्टर को शिकायत सौंपते हुए भाजपा नेता राजेन्द्र चौधरी ने जिला प्रशासन से आर-पार की मांग की है। उन्होंने कहा है किविद्यालय की वर्तमान चयन सूची और प्रवेश से जुड़े सभी आवेदनों व दस्तावेजों की किसी स्वतंत्र उच्चस्तरीय टीम से गहन स्क्रूटनी (जांच)कराई जाए। नियमों के विरुद्ध और फर्जी तरीके से पते बदलकर लिए गए सभी प्रवेशों की चयन सूची को तत्काल प्रभाव से निरस्त** किया जाए। इस साठगांठ में शामिल विद्यालय प्रबंधन, जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
अभिभावकों में पनपा भारी आक्रोश
इस खुलासे के बाद पनागर और रैपुरा क्षेत्र के स्थानीय नागरिकों और गरीब अभिभावकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके बच्चों का हक मारकर बाहरी संपन्न लोगों को पिछले दरवाजे से उपकृत किया गया है। अब पूरे क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग तेज हो गई है।अब गेंद जबलपुर जिला प्रशासन और कलेक्टर के पाले में है। देखना यह होगा कि क्या इस गंभीर शिकायत पर लीपापोती होती है या फिर कोई बड़ी दंडात्मक कार्रवाई कर पीडि़त स्थानीय बच्चों को उनका हक वापस दिलाया जाता है।
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