मध्‍यप्रदेश

MP के स्कूलों से सामने आया 81 करोड़ का घोटाला, 20 लोग गिरफ्तार, 11 स्कूलों पर FIR

बलपुर: स्कूलों (MP schools) के मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने के खिलाफ मध्य प्रदेश के जबलपुर प्रशासन (Jabalpur Administration of Madhya Pradesh) ने बड़ी कार्रवाई की गई है. 11 निजी स्कूलों के स्कूलों से 20 लोगों की गिरफ्तारी किया गया है और भी लोग के गिरफ्तार होने की आशंका है. इन स्कूलों में नियमों की अवहेलना करते हुए फीस बढ़ाई और अभिभावकों पर स्कूल के किताबों केवल निर्धारित दुकानों से खरीदने के लिए दबाव डाला.

जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना एवं पुलिस अधीक्षक आदित्य प्रताप सिंह ने आज कलेक्टर कार्यालय में संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में यह जानकारी दी. जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना का कहना है कि अभिभावकों से शिकायत मिलने के बाद हमने निजी स्कूलों और प्रकाश कंपनी के खिलाफ जांच की, जिसमें प्रकाश कंपनी के साथ-साथ फीस में अनियमितता और स्कूली किताबों की कीमत में अनियमितता का मामला सामने आया.


स्कूल प्रबंधन और प्रकाशक सांठगांठ बनाकर अभिभावकों से फीस और किताबों के रूप में अधिक पैसे वसूल रहे थे. हमने जांच के बाद 11 स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की है और कई स्कूलों से उनके प्रबंधन में अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया है. अगर प्रशासन कार्रवाई करेगा तो उन्हें भी परेशानी होगी साथ में बच्चों को भी. जिला प्रशासन ने 11 स्कूलों पर 2-2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है, साथ ही बढ़ी हुई फीस भी अभिभावकों को लौटाने का निर्देश दिया है. जिला प्रशासन का कहना है कि अगर फीस वापस नहीं की गई तो स्कूलों की संपत्ति कुर्क कर फीस वापस कर दी जाएगी.

कलेक्टर दीपक सक्सेना ने कहा कि हमारा लक्ष्य बिल्कुल साफ था और सरकार के निर्देश बिल्कुल साफ थे. हमने सबसे पहले स्कूलों का रेगुलेशन को देखा, स्कूलों के कामकाज को समझा, स्कूल शिक्षा विभाग के लोगों से बात की साथ पेरेंट्स से भी बात की. फिर हमने देखा कि स्कूलों में किस तरह की अनियमितताएं हो रही है. हमें शांति से उन अनियमितताओं के सबूत जुटाए और 11 स्कूलों का डेटा निकालकर जो निष्कर्ष निकला उसे सब हैरान रह गए.

जिलाधिकारी आगे बताते हैं कि स्कूलों ने अनाधिकृत रूप 81 करोड़ 30 लाख रुपए की फीस वसूली है. जो हमने वापस करने के आदेश दिए हैं और 22 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है. बड़े स्कूल द्वारा किए इस काम से पता चलता है कि उनकी मंशा गलत थी. स्कूलों तथ्यों को छिपाने के लिए अलग-अलग तरीके से काम किया है. स्कूलों ने जानबूझकर कर निर्धारित से अधिक किताबें को शामिल किया, फर्जी आईएसबीएन वाली किताबें शामिल की गईं और फिर मार्जिन पर भारी कमीशन वसूला गया.

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