
नई दिल्ली। पंजाब (Punjab) में हाल ही में हुए दो धमाकों (Blasts) ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था (Security Arrangements) को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। मंगलवार रात कुछ घंटों के अंतराल में दो अलग-अलग शहरों में सैन्य परिसरों (Military Complexes) के बाहर हुए विस्फोटों ने न केवल सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है, बल्कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई समर्थित खालिस्तानी नेटवर्क की सक्रियता की आशंका भी गहरा दी है। हालांकि इन घटनाओं में किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले को बेहद गंभीरता से ले रही हैं।
ऑपरेशन सिंदूर की बरसी से ठीक पहले सैन्य ठिकानों के आसपास हुए ये धमाके राज्य पुलिस की खुफिया व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करते हैं। साथ ही यह घटनाएं जमीनी स्तर पर सुरक्षा और निगरानी बढ़ाने की जरूरत का संकेत देती हैं। पंजाब पुलिस के डीजीपी ने इन विस्फोटों के पीछे आईएसआई समर्थित साजिश होने की आशंका जताई है। इस आशंका को इसलिए भी बल मिलता है क्योंकि अलगाववादी संगठन Khalistan Liberation Army ने जालंधर विस्फोट की जिम्मेदारी ली है। यह संगठन पहले भी आईएसआई और कनाडा से समर्थन मिलने के आरोपों में चर्चा में रहा है तथा केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन माना जाता है।
पिछले कुछ महीनों में पंजाब में सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने वाली कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अप्रैल में पटियाला-राजपुरा रेलवे ट्रैक पर आईईडी विस्फोट हुआ था। वहीं, चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित भाजपा कार्यालय के बाहर ग्रेनेड हमला किया गया। इससे पहले जनवरी 2026 में गणतंत्र दिवस से पहले सरहिंद रेलवे ट्रैक पर विस्फोट की घटना हुई थी। नवंबर 2025 में मोगा के सीआईए कार्यालय पर ग्रेनेड फेंका गया, जबकि मार्च 2025 में अमृतसर के खंदवाला इलाके में एक धार्मिक स्थल के बाहर धमाका हुआ था।
इन घटनाओं से यह संकेत मिलते हैं कि सीमापार बैठे तत्व राज्य में अस्थिरता फैलाने की कोशिशों में लगातार जुटे हुए हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इन गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया, तो इससे आम लोगों में भय और असुरक्षा का माहौल बन सकता है। साथ ही, 1980 और 1990 के दशक के उग्रवाद की दर्दनाक यादें भी फिर ताजा हो सकती हैं।
इस बीच जांच एजेंसियां सभी घटनाओं की गंभीरता से पड़ताल कर रही हैं। ऐसे संवेदनशील माहौल में राजनीतिक बयानबाजी से बचने की जरूरत भी महसूस की जा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर जिम्मेदार पदों पर बैठे नेताओं को संयमित रवैया अपनाना चाहिए। फिलहाल, पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है और सुरक्षा एजेंसियों के सामने सीमापार साजिशों के साथ-साथ आंतरिक सतर्कता बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी है।
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