
वाराणसी। गंगा में बाढ़ के कारण काशी के कई मंदिरों में पानी घुस गया है। मणिकर्णिका घाट स्थित प्रसिद्ध रत्नेश्वर महादेव मंदिर पूरी तरह जलमग्न हो गया है। वहीं पंचगंगा और बालाजी घाट पर स्थित श्री राघवेश्वर महादेव मंदिर में भी गंगा का पानी प्रवेश कर गया है। बाढ़ के बीच शिवलिंग पानी में डूबे दिखाई दे रहे हैं, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था कम नहीं हुई है। भक्त पानी में भी महादेव की पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
केंद्रीय जल आयोग की मंगलवार सुबह 8 बजे की रिपोर्ट के अनुसार गंगा का जलस्तर 60.97 मीटर दर्ज किया गया। सुबह जलस्तर स्थिर था, लेकिन जल पुलिस के प्रभारी सुधीर त्रिपाठी ने बताया कि सुबह 9 बजे के बाद गंगा नदी का पानी फिर 8 सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ने लगा है। स्थिति को देखते हुए जल पुलिस काशी के सभी 84 घाटों पर निगरानी कर रही है। घाट किनारे बैरिकेटिंग कर लोगों से गहरे पानी में न जाने की अपील की जा रही है।
इस बाढ़ के कारण श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन उनकी श्रद्धा में कोई कमी नहीं आई है। भक्तगण जलमग्न मंदिरों में भी अपने आराध्य की पूजा कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर घाटों पर निगरानी बढ़ा दी है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। गंगा का जलस्तर बढ़ने से काशी के धार्मिक स्थलों पर भी असर पड़ा है। श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आई है, लेकिन जो लोग वहां पहुंच रहे हैं, वे अपने विश्वास के साथ पूजा-अर्चना कर रहे हैं। जल पुलिस ने सभी घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
इस स्थिति में प्रशासन की ओर से लगातार जानकारी दी जा रही है और लोगों को सुरक्षित रहने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ के कारण उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद काशी की धार्मिक आस्था अडिग है। भक्तगण अपने आराध्य की कृपा के लिए प्रार्थना कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि जलस्तर जल्द ही सामान्य होगा। गंगा के बढ़ते जलस्तर ने काशी के धार्मिक जीवन को प्रभावित किया है, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति में कोई कमी नहीं आई है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा उपायों को लागू किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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