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शिव शयनोत्सव: विष्णु जी के बाद अब सोने जा रहें भगवान शिव, जानें कैसे चलेगी सृष्टि

आषाढ़ मास की देवोशयनी एकादशी (Devoshayani Ekadashi) यानी 20 जुलाई 2021 को सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु योग निद्रा में जा चुके हैं। भगवान विष्णु के बाद अब भगवान शिव भी शयन में चले जाएंगे। इस दिन को शिव शयनोत्सव कहा जाता है। इस साल शिव शयनोत्सव 23 जुलाई, दिन शुक्रवार को है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भोलेनाथ के शयन में जाने से पहले वह अपने एक स्वरूप रुद्र को सृष्टि का कार्यभार सौंप देते हैं।

4 महीने जगत का संचालन करेंगे भगवान रुद्र-
भगवान शिव (Lord Shiva) के अवतार रुद्र सृष्टि के संचालन के साथ-साथ सृष्टि के भर्ता की भी जिम्मेदारी निभाएंगे। इस दिनों में भगवान रुद्रा की पूजा का विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि भगवान रुद्र (Lord Rudra) जल्दी प्रसन्न होते हैं और इन्हें क्रोध भी जल्दी आता है। मान्यता है कि सृष्टि के संचालन के दौरान भक्त के कार्यों से प्रसन्न होकर वे उनकी समस्याओं को खत्म कर सकते हैं या क्रोधित होकर परेशानियों को बढ़ा सकते हैं।

भगवान शिव को प्रिय है सावन मास-
भगवान शिव के शयन में जाने के दो दिन बाद उनका प्रिय महीना सावन शुरू होगा। सावन का महीना इस साल 25 जुलाई से शुरू होगा, जबकि सावन का पहला सोमवार 26 जुलाई को पड़ेगा। सावन में भगवान शिव और सोमवार के दिन व्रत और पूजा-अर्चना (worship) का विशेष महत्व होता है। कहते हैं कि भक्त की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव उन पर अपनी कृपा बरसाते हैं।


चातुर्मास में आते हैं ये त्योहार-
चातुर्मास में सावन, हरियाली तीज (Hariyali Teej) और रक्षाबंधन जैसे त्योहार आते हैं। इन दिनों में दान, तप और जप का विशेष महत्व होता है। आपको बता दें कि आषाढ़ मास के 5 दिन, सावन मास के 30 दिन, भाद्रपद की 30 दिन, आश्विन मास की 30 दिन और कार्तिक मास के 11 दिन मिलाकर चंद्रमास के हिसाब से 106 और सौर मास के हिसाब से 108 दिनों का चातुर्मास बनता है।

नोट- उपरोक्त दी गई जानकारी व सूचना सामान्य उद्देश्य के लिए दी गई है। हम इसकी सत्यता की जांच का दावा नही करतें हैं यह जानकारी विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, धर्मग्रंथों, पंचाग आदि से ली गई है । इस उपयोग करने वाले की स्वयं की जिम्मेंदारी होगी ।

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