नई दिल्ली। सोने और चांदी की (Gold & Silver) कीमतों में लगातार चौथे दिन गिरावट दर्ज की गई है। सोमवार से गुरुवार के बीच चांदी करीब 7,000 रुपये और सोना लगभग 2,500 रुपये सस्ता हो चुका है। ऐसे में निवेशकों और खरीदारों (Investors and buyers) के बीच सवाल है कि क्या कीमती धातुओं में गिरावट आगे भी जारी रहेगी या फिर जल्द ही कीमतों में तेजी लौट सकती है। खासकर करवाचौथ, धनतेरस और दिवाली जैसे त्योहारों से पहले सोने-चांदी की मांग बढ़ने की उम्मीद रहती है।
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक गुरुवार को 24 कैरेट सोने की कीमत 10 ग्राम पर 1,231 रुपये घटकर 1.51 लाख रुपये रह गई। वहीं, चांदी की कीमत में 4,518 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट आई और यह 2.28 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई।
गिरावट को अस्थायी मान रहे हेज फंड मैनेजर
ऑस्ट्रेलिया के हेज फंड मैनेजर राफेल लैम के मुताबिक सोने की कीमतों में हालिया गिरावट अस्थायी हो सकती है। उनका लॉन्ग-शॉर्ट गोल्ड फंड पिछले साल लॉन्च होने के बाद से निवेशकों को 200 प्रतिशत से अधिक नेट रिटर्न दे चुका है। लैम का कहना है कि सोने की लंबी अवधि की तेजी को सहारा देने वाले प्रमुख कारक अभी भी मौजूद हैं।
अमेरिकी कर्ज और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से मिल सकता है समर्थन
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक लैम ने कहा कि बड़े बाजारों की राजकोषीय स्थिति टिकाऊ नहीं है। उन्होंने खास तौर पर अमेरिकी सरकार के 40 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के कर्ज और केंद्रीय बैंकों की लगातार बढ़ती सोने की खरीदारी का उल्लेख किया। उनके मुताबिक ये कारक मध्यम से लंबी अवधि में सोने की कीमतों को समर्थन दे सकते हैं।
हालांकि, निकट अवधि में सोने की कीमतों पर अमेरिका-ईरान युद्ध, वास्तविक ब्याज दरों और महंगाई के आंकड़ों का असर रह सकता है। लैम, मार्क लांडाऊ के साथ 1.5 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब 1.1 अरब अमेरिकी डॉलर) के एल1 गोल्ड फंड का सह-प्रबंधन करते हैं।
ईरान युद्ध और ब्याज दरों से कीमतों पर दबाव
जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। ऊर्जा कीमतों में तेजी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाओं का असर सोने पर पड़ा है। दिए गए आंकड़ों के अनुसार फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से सोने की कीमत करीब 16 प्रतिशत नीचे आ चुकी है।
लैम ने कहा कि ईरान युद्ध के बाद सोने के बाजार और कीमतों के सामने कुछ विपरीत परिस्थितियां जरूर आई हैं, लेकिन उनके अनुसार ये प्रभाव अस्थायी हैं। उनका मानना है कि सोने की मांग को समर्थन देने वाले ज्यादातर प्रमुख कारक मध्यम अवधि में बने रहेंगे और कुछ और मजबूत हो सकते हैं।
4,286 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार
गुरुवार शाम सिडनी में सोना 4,286.01 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। लैम ने बताया कि जब सोने की कीमत 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे गई थी, तब उनके फंड ने अपनी लॉन्ग पोजिशन तेजी से बढ़ानी शुरू कर दी थी। फिलहाल फंड की नेट लॉन्ग पोजिशन लो-टू-मिड 60 प्रतिशत के स्तर पर है। उन्होंने संकेत दिया कि सोने में आगे तेजी की उनकी उम्मीद कमजोर होने पर ही फंड अपनी लॉन्ग पोजिशन कम करने पर विचार करेगा।
त्योहारी सीजन में मांग पर नजर
आने वाले समय में करवाचौथ, धनतेरस और दिवाली जैसे त्योहारों के कारण घरेलू बाजार में सोने-चांदी की मांग महत्वपूर्ण रहेगी। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्याज दरों, महंगाई और भू-राजनीतिक घटनाक्रम के साथ-साथ त्योहारी मांग भी कीमतों की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हो सकती है।
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