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किसी महिला के तरीको पर ताना कसना क्रूरता नहीं माना जाएगा: बॉम्बे हाईकोर्ट

नई दिल्‍ली (New Dehli) । ये घरेलू मामला (domestic matter)था जो कोर्ट पहुंचा, अब उस पर फैसला (Decision)आ गया है. एक महिला ने अपने पति के रिश्तेदारों (relatives)के खिलाफ एफआईआर यानी प्राथमिकी दर्ज (FIR lodged)करा दी. आरोप ये था कि उसके पति के रिश्तेदारों ने महिला के भोजन पकाने के तरीके पर सवाल खड़े किए थे. महिला की मानें तो उसको ये उल्टी-पुल्टी बात रास नहीं आई. आखिरकार हुआ ये कि वह थाने पहुंच गई. मामला एफआईआर के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट तक पहुंचा. हाईकोर्ट ने ‘संदेश मधुकर सालुंखे और अन्य बनाम महाराष्ट्र राज्य’ नाम के इस केस को सुना. कोर्ट ने अब एफआईआर को रद्द कर दिया है. कोर्ट का कहना था कि नकारात्मक टिप्पणी को आईपीसी की धारा 498ए क्रूरता नहीं मानती।


पत्नी ने जो एफआईआर दर्ज कराया था, उसमें आरोप था कि उसके पति के भाई यह कहते हुए उसको ताना मारते हैं कि उसे खाना बनाना नहीं आता. महिला के मुताबिक उसके परिवार वाले ये कहते हुए अपमानित करते थे कि उसके माता-पिता ने भोजन बनने का सही तरीका उसको नहीं सिखाया. बॉम्बे हाईकोर्ट में अनुजा प्रभुदेसाई और एनआर बोरकर कर के दो जज हैं. उन्होंने इस मामले को विस्तार से सुना और आईपीसी की धारा 498A की व्याख्या की. कहा कि आईपीसी की धारा 498A ऐसे कमेंट्स को क्रूरता नहीं मानती।

मामला थोड़ा विस्तार से जानिए

महिला की शादी साढ़ें तीन साल पहले हुई थी. अपने शिकायत पत्र में उन्होंने शादी की तारीख 13 जुलाई 2020 बताया है. महिला का आरोप था कि शादी के महज चार महीने बाद उनको ससुराल से निकाल दिया गया. आखिरकार उन्होंने एफआईआर दर्ज कराने का मन बनाया. दो महीने बाद जनवरी, 2021 में प्राथमिकी दर्ज कराई जिसमें दावा किया कि उनके पति ने शादी के पहले ही दिन से किसी भी तरह का कोई दाम्पत्य संबंध नहीं निभाया. दाम्पत्य संबंध का अर्थ ऐसे रिश्ते से है जहां दो लोग शारीरिक, सामाजिक और भावनात्मक तौर पर एक दूसरे से जुड़े होते हैं।

कोर्ट ने FIR खारिज करते हए क्या कहा

महिला के पति को इस बात ही नहीं पूरे एफआईआर पर आपत्ति थी. आरोपी पति ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया. कोर्ट से एफआईआर रद्द करने की मांग की. कोर्ट ने आईपीसी की धारा 498ए को इस संदर्भ में डिफाइन किया. कोर्ट ने पाया कि आईपीसी की धारा 498ए के छोटे-मोटे झगड़े को क्रूरता नहीं मानती. उच्च न्यायालय ने कहा कि धारा 498ए के तहत अपराध तभी साबित हो सकता है जब किसी भी महिला के साथ क्रूरता लगातार और लंबे अरसे तक की गई हो. ऐसे में कोर्ट ने इस मामले को खारिज करना ही बेहतर समझा।

क्या है आईपीसी की धारा 498A?

आईपीसी की धारा 498A महिलाओं से जुड़े क्रूरता के मामले में अक्सर चर्चा में रहती में है. इसमें यह प्रावधान है कि अगर किसी शादीशुदा महिला पर उसके पति या ससुराल वाले किसी भी तरह की ‘क्रूरता’ करते हैं तो वह आईपीसी की धारा 498A के तहत अपराध माना जाएगा. ‘क्रूरता’ क्या है और क्या नहीं, इसको कोर्ट ने कई मामलों में अलग-अलग ढंग से परिभाषित किया है. समय-समय पर 498A की आलोचना भी हुई है. खासकर उन मामलों में जब किसी महिला ने इसका बेजा इस्तेमाल किया. झारखंड हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि कुछ महिलाएं खासकर जो अपने ससुराल वालों से किसी बात को लेकर संतुष्ट नहीं, इस धारा का इस्तेमाल ढाल के बजाय एक हथियार के रूप में कर रही हैं।

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