
नई दिल्ली: देश की राजनीति में एक बार फिर ‘नारी शक्ति’ को लेकर घमासान छिड़ गया है. लोकसभा में महिला आरक्षण (Women’s Reservation) के लिए जरूरी संविधान संशोधन बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के पारित न हो पाने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कड़ा रुख अपनाया है. बीजेपी ने कल से पूरे देश में विपक्ष के खिलाफ बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है.
विरोध प्रदर्शन को धार देने के लिए गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई. इस बैठक में BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नितिन नवीन, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत कई दिग्गज नेता शामिल हुए. सूत्रों के मुताबिक, बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि कैसे इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाकर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को बेनकाब किया जाए. आज लोकसभा में बहुत अजीब दृश्य दिखा।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए जरूरी संविधान संशोधन बिल को कांग्रेस, TMC, DMK और समाजवादी पार्टी ने पारित नहीं होने दिया। महिलाओं को 33% आरक्षण देने के बिल को गिरा देना, उसका उत्साह मनाना और जयनाद करना सचमुच निंदनीय और कल्पना से परे है।
विपक्ष पर बरसे अमित शाह
लोकसभा में बिल गिरने के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने गहरी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने सोशल मीडिया और अपने बयानों के जरिए कहा कि कांग्रेस, TMC, DMK और समाजवादी पार्टी ने इस महत्वपूर्ण बिल को पारित नहीं होने दिया. उन्होंने इस दृश्य को ‘अजीब और निंदनीय’ करार देते हुए कहा कि महिलाओं को मिलने वाले 33% आरक्षण को रोकना और फिर उसका जश्न मनाना देश की आधी आबादी का अपमान है.
2029 चुनाव में भुगतना होगा अंजाम
अमित शाह ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि विपक्ष की यह जीत क्षणिक है. उन्होंने कहा, “नारी शक्ति के अपमान की यह बात दूर तक जाएगी. विपक्ष को महिलाओं का यह आक्रोश न केवल 2029 के लोकसभा चुनाव में, बल्कि आने वाले हर चुनाव और हर स्तर पर झेलना पड़ेगा.”
NDA भी प्रदर्शन में होगा शामिल
BJP के इस देशव्यापी आंदोलन में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के तमाम सहयोगी दल भी शामिल होंगे. BJP का आरोप है कि कांग्रेस ने बार-बार महिला हितों के खिलाफ काम किया है और इस बार भी उन्होंने अपना पुराना इतिहास दोहराया है. कल से शुरू होने वाले इस प्रदर्शन के जरिए BJP देशभर की महिलाओं को यह बताएगी कि कैसे उनके अधिकारों को संसद में विपक्ष द्वारा छीना गया है.
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