
जबलपुर। पश्चिम मध्य रेलवे के मुख्यालय से महज करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित अधारताल रेलवे स्टेशन रात होते ही बदहाल और असुरक्षित नजर आता है। रविवार रात करीब 11:30 बजे स्टेशन परिसर की स्थिति ऐसी थी कि यात्रियों को प्लेटफॉर्म से बाहर निकलने तक में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। स्टेशन भवन को छोड़कर परिसर के अधिकांश हिस्सों में पर्याप्त रोशनी नजर नहीं आई। स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा के लिए आरपीएफ और जीआरपी का कोई जवान नजर नहीं आया। प्लेटफॉर्म की हालत भी खराब दिखाई दी। कहीं उखड़ा फर्श तो कहीं कीचड़ और अंधेरा यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।
वेटिंग रूम में यात्री कम, कुत्ते ज्यादा
रात के समय स्टेशन के वेटिंग रूम की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। यहां यात्रियों के साथ आवारा कुत्ते भी घूमते नजर आते हैं। रात में यात्रियों को इनसे परेशानी होती है, लेकिन उन्हें हटाने या सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए कोई कर्मचारी नजर नहीं आता।
शाम ढलते ही स्टेशन पर पसरा अंधेरा
अधारताल प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में मजदूर और नौकरीपेशा लोग ट्रेनों से आवागमन करते हैं। यात्रियों के लिए स्टेशन महत्वपूर्ण साधन है, लेकिन शाम के बाद यहां की स्थिति बदल जाती है। यात्रियों के मुताबिक स्टेशन की कई लाइटें खराब हैं या लंबे समय से बंद पड़ी हैं। अंधेरे में लोगों को टॉर्च के सहारे प्लेटफॉर्म और रास्ता तलाशना पड़ता है।
आरपीएफ-जीआरपी की मौजूदगी पर सवाल
यात्रियों का कहना है कि स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरे तो लगाए गए हैं, लेकिन वे प्रभावी रूप से काम कर रहे हैं या नहीं, इसकी जानकारी यात्रियों को नहीं है। रात के समय स्टेशन पर सुरक्षा जवानों की नियमित मौजूदगी नहीं होने से यात्रियों में असुरक्षा की भावना बनी रहती है। अमरकंटक, नर्मदा एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों से उतरने वाले यात्रियों को स्टेशन से बाहर निकलने के दौरान अंधेरे का सामना करना पड़ता है। स्टेशन के बाहर तत्काल ऑटो नहीं मिलने से कई यात्रियों को मुख्य मार्ग तक पैदल जाना पड़ता है।
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