
- रोजाना दूसरे थानों में रात गुजारते हैं अपराधी
उज्जैन। शहर में पंवासा और चिंतामण थाना ऐसे दो थाने हैं जहां पकड़ाए गए आरोपियों को रखने के लिए बंदीगृह की सुविधा नहीं है। यहाँ के बंदियों को रोजाना रात में अन्य थानों में शिफ्ट करना पड़ता है। इसके अलावा यहां कई मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव हैं।
उल्लेखनीय यह हैं कि शहर के बढ़ते दायरे को देखते हुए 6 साल पहले शहरी क्षेत्र में दो नए थाना क्षेत्र बढ़ाए गए थे और किराए के भवन और जमीन पर इन थानों को शुरु किया गया था। तब से लेकर आज तक यह थाने किराये के जमीन और भवन पर ही चल रहे हैं। दोनों के लिए पुलिस विभाग को जमीन नहीं मिल पा रही। शहरी क्षेत्र में बढ़ते दायरे तथा उसी के अनुपात में बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस विभाग द्वारा साल 2020 में दो थाना क्षेत्र नए बनाकर वहाँ थाना भवन स्थापित करने के प्रयास किए गए थे। तब कहीं जाकर 6 साल पहले 5 जुलाई 2020 को पंवासा तथा चिंतामण थाने का शुभारंभ हो पाया था लेकिन सुविधाओं के नाम यह दोनों थाने आज भी अछूते हैं। यहाँ न तो सुविधाघर हैं ना ही जब्त वाहन रखने के लिए सुरक्षित परिसर। दोनों ही थाने किराए के भवन में संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा यहां बंदीगृह की सुविधा भी नहीं हैं। यहीं कारण है कि रोजाना पंवासा थाने के अपराधी चिमनगंज थाने में तथा चिंतामण थाने के पकड़ाए गए अपराधी महाकाल थाने में रखे जाते हैं। ऐसे में पुलिस जवानों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही हैं।