
टेलर के जलवे भी कम नहीं, बदलवाई होटल
भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष टेलर आखिरकार इंदौर आ ही गए। उनके आने पर युवाओं ने खूब धमाल-चौकड़ी भी कर डाली। अब देखना है कि टेलर किस-किस का नाप लेकर गए हैं, जिन्हें अध्यक्ष का कोट पहनना है? खैर टेलर के अध्यक्ष के लिए कपड़े तो बाद में आएंगे, लेकिन टेलर का इंदौर दौरा भी किसी जलवे से कम नहीं रहा। हाथ जोडक़र जैसे-तैसे इंदौरी नेताओं ने मंच लगवा लिए। पूरे शहर को बदरंग कर दिया। यही नहीं टेलर भी उनसे आगे निकले। टेलर को लेमन ट्री होटल में ठहराने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन उन्हें होटल पसंद नहीं आई तो बाद में उन्हें प्रिंसेस पैलेस में ठहराया गया। खाना भी उनका मनपसंद आया। वैसे भाजपा के अधिकांश पदाधिकारी भाजपा कार्यालय पर ही ठहरते हैं। अब टेलर का एक और मामला सोशल मीडिया पर सुर्खियां बंटोर रहा है, जिसमें वे रात में किसी बैंक के वॉशरूम का उपयोग कर रहे हैं।
जोश में होश खो बैठी कांग्रेस की नेत्री
कभी-कभी नेताओं को उनका जोश ही ले उठता है। एनएसयूआई अध्यक्षों से मीनाक्षी मामले में प्रदर्शन नहीं करने पर जवाब मांगा तो महिला कांग्रेस भी सक्रिय हो उठीं। कलेक्टर कार्यालय पर हुए प्रदर्शन में एक महिला नेत्री आगे बढक़र होश खो बैठी और पुलिस वालों को श्वान की संज्ञा दे डाली। इसके अलावा महिला नेत्री का जोश और भी उबाले लेने लगा। अब उसके बाद एक महिला सिपाही की शिकायत पर पुलिस ने सभी नेत्रियों के खिलाफ एफआईआर कर ली है, साथ की नेत्रियां भी अफसोस कर रही है कि अगर ये जोश में नहीं आती तो कार्रवाई नहीं होती।
मुंह पर जिनका विरोध… जेब में उन्हीं से फायदा
जीतू पटवारी का वेयर हाउस है, ये तो मालूम था, लेकिन हर दिन सरकार को कोसने वाले जीतू भाई सरकार से किस तरह का फायदा ले रहे हैं, उसकी भी पोल खुल गई, जब उनके वेयर हाउस पर छापा पड़ा। उनके वेयर हाउस में सरकारी गेहूं का भंडारण होता है, यानी वे केवल राजनीति में विरोध करते हैं, लेकिन कमाई-धमाई के मामले में सरकार से ही समझौता कर लेते हैं। वैसे ये पॉलीटिक्स है प्यारे। यहां जो दिखता है वो होता नहीं है और जो होता है वो दिखता नहीं है। अब जीतू भैया कहेंगे कि ये उनका धंधा है तो हम कहेंगे कि सरकार से फायदा ले रहे हो तो फिर विरोध करना भी छोड़ दो।
किस-किस को पकड़े, कूदकर बाहर होने लगते हैं
एक पुरानी कहावत है कि आप मेंढकों को एक बर्तन में नहीं रख सकते हैं। वे बार-बार कूदकर बाहर होने लगते हैं। ऐसा ही कुछ शहर कां कांग्र्रेस में नजर आ रहा है। चिंटू चौकसे ने जैसे-तैसे कांग्रेस को इंदौर में प्रमुख विपक्ष की भूमिका में लाकर खड़ा कर दिया है, लेकिन कुछ विघ्नसंतोषी कांग्रेसी उनके इस काम में आड़े आ रहे हैं और संगठन को छिन्न-भिन्न करने में लगे हैं। चिंटू कर क्या सकते हैं, नोटिस देकर जवाब-तलब कर सकते हैं, लेकिन कांग्रेसी है कि मानते नहीं। इन कांग्रेसियों को एक जाजम पर बिठाना चिंटू के लिए चुनौती तो हैं ही, लेकिन कांग्रेसी उनके सामने तो बैठ जाते हैं, लेकिन उनके पीठ फेरते ही फिर आपे से बाहर हो जाते हैं। अब चिंटू करें तो क्या करें? चिंटू भाईये कांग्रेस है, ये तो चलता ही रहेगा, आप तो अपना फोकस रखो।
पार्षद के जेठ और पति संभालते हैं वार्ड का काम
भाजपा भले ही नारी वंदन बिल लाकर महिलाओं को आरक्षण का अधिकार देना चाहती है, लेकिन भाजपा के अंदर ही नारियों को बराबर का अधिकार नहीं मिल पा रहा है। ताजा उदाहरण वे महिला पार्षद हैं, जो नाम की तो हैं, लेकिन काम उनके पति करते हैं और आरक्षण के चक्कर में घर बैठी महिलाओं को आगे कर दिया। ऐसा ही एक मामला वार्ड 16 का सामने आया, जब महावीर नगर में गंदे पानी का मुद्दा उठा। लोगों का कहना था कि हमने तो हमारी पार्षद का मुंह तक नहीं देखा। उनके पति और जेठ नितिन धारकर ही पूरा काम संभालते हैं। अब बेचारे लोग भी क्या करें, एक बार ठगे गए सो ठगे गए।
एकलव्य की अपील
चार नंबर विधानसभा में आरएसएस पदाधिकारी और मालिनी गौड़ समर्थक के बीच हुए विवाद के बाद यहां की राजनीति गर्माई हुई है। इसमें विधायक खेमे का ही ज्यादा नुकसान हुआ है और जिस शेडगे की तरफदारी हो रही थी, उसी की बुराई हो रही है, लेकिन गौड़ के पुत्र एकलव्यसिंह गौड़ ने किसी भी बात पर अपने कार्यकर्ताओं को बयानबाजी करने से मना कर दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि ऐसी स्थिति में हमें सोशल मीडिया पर भी कोई टिप्पणी नहीं करना है।
सांवेर में ग्रीन फील्ड कॉरिडोर के भूमिपूजन में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय नाराज दिखाई दिए। जब सभी नेता भूमिपूजन का बटन दबा रहे थे, तब वे एक ओर बैठे रहे। बाद में सिलावट उनके पास आए और उन्हें जबर्दस्ती साथ ले गए। वे क्यों नाराज थे, इसकी चर्चा आयोजन स्थल पर चल पड़ी। -संजीव मालवीय
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