
भाजपाइयों को हजम नहीं हो रहे राकेश यादव
राकेशसिंह यादव भाजपा (BJP) में तो आ गए, लेकिन भाजपाइयों को उनका आना हजम नहीं हो रहा है। एक तो वे कहां भाजपा की बुराई करते थकते नहीं थे और जब पार्टी बदल ली है तो उनका सीधे प्रदेश स्तर के नेताओं की कतार में बिठाकर प्रवक्ता (Spokesperson) का पद दे दिया गया है। कभी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने उनके बयान पर कहा था कि कौन राकेश यादव, मैं किसी राकेश यादव को नहीं जानता। अब उन्हीं राकेश यादव के साथ मंच शेयर करना पड़ेगा। यही नहीं राकेश यादव को जिस प्लानिंग से भाजपा में लाया गया, उसमें पटवारी का योगदान रहा और उनके बयान को ही आधार बनाया गया। राकेश यादव ने कहा कि वे बार-बार राहुल गांधी को पत्र लिखकर प्रदेश कांग्रेस के हालात बताते थे, लेकिन वहां से नहीं सुनी जाती थी। दरअसल यादव इंदौर में अपनी ही कांग्रेस चला रहे थे, जो यहां के स्थानीय नेतृत्व को खल रहा था। अब देखना यह है कि राकेश यादव की भाजपा में कितनी चलती है या फिर एक भाजपा दफ्तर इंडियन कॉफी हाउस में ही खुल जाएगा।
गायब से हैं शहर कांग्रेस के फायर ब्रांड नेता
छोटी-छोटी बातों पर हुक्का पानी लेकर प्रशासन और नगर निगम पर चढ़ाई करने वाले कुछ नेताओं की आवाज धीमी पड़ती सुनाई दे रही हैं। नहीं तो महीने के सात दिनों वे कोई न कोर्ईबड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया करते थे। अब इसे कांग्रेस का अनुशासन कहे या मुद्दे नहीं होना। वैसे शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने ऐसे नेताओं को चेता दिया है कि कांग्रेस की मंजूरी के बिना कुछ भी बयानबाजी नहीं करें और न ही कोई आंदोलन या धरना करें। वैसे जो अध्यक्ष अब तक आए, इन नेताओं ने बात नहीं मानी, लेकिन चिंटू का दम तो यहां नजर आ रहा है।
गुरु तो ठीक चेले भी ठिकाने लग गए
जीतू जिराती का नाम राज्यसभा के लिए उछला था और माना जा रहा था कि पार्टी उन्हें अब तक की सेवा का बदला सदन के सबसे सर्वोच्च शिखर में पहुंचाकर देगी। जिस दिन प्रत्याशी तय हो रहे थे उस दिन जीतू का नाम भी चला, लेकिन भोपाल तक पहुंचते-पहुंचते जीतू का नााम गायब हो गया। अब यही उनके चेले नीलेश चौधरी के साथ हुआ। नीलेश का नाम ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष के रूप में उभरकर सामने आया था और वे मानकर चल रहे थे कि गुरु की बजाय पार्टी उन्हें जरूर मौका देगी, लेकिन पार्टी ने निखिल सोनी के नाम पर मुहर लगा दी।
कहां से लाऊं इतनी साइकिल
कल निकलने वाली
कांग्रेस की साइकिल रैली को लेकर इन दिनों कांग्रेसी नेता साइकिलों की जुगाड़ कर रहे हैं। कुछ तो अपने बड़े नेताओं के माथे ही पड़ गए हैं कि साइकिल लाकर दो, ताकि रैली में हम आ सके। अब बड़े नेता भी पशोपेश में हैं कि इतनी साइकिलें आखिर कहां से लेकर आएं? वैसे एआईसीटीएसएल की साइकिल सर्विस कांग्रेसियों के लिए सहारा बनकर सामने आई है, जिसमें उनसे कहा गया है कि कैसे आपको सिटी बस की साइकिल की सुविधा लेना है।
जब भावुक हो गए जीतू
जिला कार्यकर्ता सम्मेलन में एक विषय पर पूर्व विधायक जीतू जिराती को भी श्यामाप्रसाद मुखर्जी पर बोलना था। वे बोलने खड़े हुए और उनकी जीवनी पर बोलते-बोलते हुए भावुक हो गए और उनकी आंखें नम हो गई। उन्होंने कहा कि कश्मीर में एक प्रधान, एक संविधान का नारा देते-देते मुखर्जी ने बलिदान दे दिया। यह कहते हैं वे भावुक हो गए। उनकी आंखें नम होती, उसके पहले ही उन्होंने अपने आपको संभाल लिया। खैर इसकी चर्चा बाद में खूब हुई। अब ये राजनीतिक आंसू थे या फिर जिराती वास्तव में भावुक थे?
कुछ तो गड़बड़ है महापौरजी
एक पेड़ मां के नाम अभियान में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जो टिप्पणी महापौर पुष्यमित्र भार्गव को लेकर की कि आजकल वे कुछ ज्यादा ही व्यस्त रहते हैं। इसको लेकर इंदौर की राजनीति में हर कोई अपने ढंग से सोच रहा है। आखिर कैलाशजी ने महापौर को ऐसा क्यों कहा। अब ये तो महापौरजी ही बता सकते हैं कि कहां गड़बड़ है। एक समय ऐसा था कि जब महापौर अपने शुरुआती दौर में कैलाशजी को हमेशा आगे रखते थे, लेकिन जिस तरह से राजनीतिक हालात इन दिनों बने हैं, उसको लेकर महापौर पर की टिप्पणी वास्तव में कई मायने रख रही है।
-संजीव मालवीय
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