तिरूपति। आंध्र प्रदेश में तिरुपति लड्डू (Tirupati Laddoo) से जुड़े विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। राज्य सरकार द्वारा गठित एक सदस्यीय जांच आयोग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने लड्डू निर्माण के लिए 70 लाख किलोग्राम से अधिक घी बिना अनिवार्य गुणवत्ता जांच के खरीद लिया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस लापरवाही ने आपूर्तिकर्ताओं को मिलावटी घी सप्लाई करने का मौका दिया। आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की और यहां तक कि प्रयोगशाला की उन रिपोर्टों को भी दबा दिया, जिनमें वनस्पति वसा की मौजूदगी की पुष्टि हुई थी।
यह जांच सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट के बाद शुरू की गई थी। इसके आधार पर मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दिनेश कुमार की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया था।
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि यह मामला सिर्फ एक गलती नहीं, बल्कि व्यवस्थागत प्रशासनिक विफलता का परिणाम है।
गुणवत्ता जांच से जुड़े सुरक्षा उपाय समय के साथ कमजोर पड़ते गए
खरीद समिति ने कथित तौर पर बिना पूरी सहमति के नियमों में ढील दी
बोली प्रक्रिया के बाद कीमत घटाने की अनुमति दी गई
असामान्य रूप से कम दरों पर आई बोलियों को बिना पर्याप्त जांच के स्वीकार किया गया
इन सभी कारणों ने मिलकर गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली को कमजोर कर दिया।
दूसरी ओर: श्रद्धालु ने किया स्वर्ण दान
इसी बीच एक सकारात्मक खबर भी सामने आई है। बेंगलुरु के एक श्रद्धालु ने श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में करीब 95 लाख रुपये मूल्य के सात स्वर्ण पदक दान किए।
TTD के अनुसार, श्रद्धालु एम महादेवाम्मा ने लगभग 753 ग्राम वजन के ये पदक मंदिर प्रशासन को सौंपे। यह दान मंदिर परिसर के रंगनायकुला मंडपम में टीटीडी अधिकारियों की मौजूदगी में किया गया।
इस पूरे मामले ने न सिर्फ मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि प्रसाद जैसी धार्मिक आस्था से जुड़ी चीजों में गुणवत्ता और पारदर्शिता की अहमियत को भी फिर से सामने ला दिया है।
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