img-fluid

बरगी हादसे पर पर्यटन निगम के अधिकारी का अजीब दावा, बोले… लाइफ जैकेट पहनना जरूरी नहीं

May 04, 2026

  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वाटर स्पोर्ट्स के नियमों का उल्लंघन, नियमों के विपरीत चलता रहा क्रूज

जबलपुर। बरगी बांध में 30 अप्रैल को हुए क्रूज हादसे ने मध्य प्रदेश पर्यटन निगम की बड़ी लापरवाही को उजागर कर दिया है। हादसे में कई लोगों की जान चली गई, लेकिन उसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों का अजीबोगरीब रवैया सामने आ रहा है। मध्य प्रदेश पर्यटन निगम के जल क्रीड़ा सलाहकार राजेंद्र निगम ने एक हैरान करने वाला बयान दिया है। उन्होंने दावा किया है कि क्रूज में सवार होते ही लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य नहीं है। अधिकारी का कहना है कि गोवा और विदेशों में भी क्रूज में लाइफ जैकेट उपलब्ध तो रहती हैं, लेकिन यात्री उन्हें पहनते नहीं हैं। सरकार और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वाटर स्पोर्ट्स की गाइडलाइन इसके बिल्कुल विपरीत हैं और सुरक्षा मानकों के तहत क्रूज या नाव पर चढ़ते ही लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य माना जाता है।


  • सुरक्षा मानकों की हो रही थी अनदेखी
    बरगी बांध में वाटर स्पोर्ट्स और क्रूज संचालन में सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। हादसे के बाद इंटरनेट मीडिया पर जो वीडियो सामने आए, उनमें साफ दिखाई दिया कि यात्रियों को लाइफ जैकेट तब बांटी गई, जब क्रूज में भारी मात्रा में पानी भर चुका था। लोग अपनी जान बचाने के लिए घबराकर लाइफ जैकेट लेने की कोशिश कर रहे थे। कई यात्रियों को उनके सही आकार की लाइफ जैकेट तक नहीं मिली। दिल्ली से आई एक पर्यटक महिला ने अपने मासूम बेटे को लाइफ जैकेट न होने के कारण अपनी छाती से चिपका लिया था, लेकिन दोनों को नहीं बचाया जा सका। नियमों के अनुसार हर यात्री के लिए सही आकार की लाइफ जैकेट पहनना, उसे शरीर पर कसकर बांधना और सभी क्लिप बंद रखना अनिवार्य है।

    रेस्क्यू टीम और तकनीकी इंतजाम पूरी तरह फेल
    गाइडलाइन में यह स्पष्ट है कि किसी भी वाटर स्पोर्ट्स गतिविधि के दौरान एक रेस्क्यू टीम हर वक्त अलर्ट मोड पर होनी चाहिए। बरगी बांध में ऐसी कोई टीम तैनात नहीं थी। बोट संचालन स्थल के आसपास कर्मचारी मौजूद तो थे, लेकिन वे बचाव दल की तरह सक्रिय नहीं थे। रेस्क्यू के लिए तैयार की जाने वाली नाव में कम से कम 10 हॉर्स पावर का इंजन होना जरूरी है। इसके अलावा एक निगरानीकर्ता हमेशा स्टैंडबाय पर रहना चाहिए और रेस्क्यू टीम को किसी अन्य काम में नहीं लगाना चाहिए। बरगी में इन सभी नियमों का उल्लंघन किया गया। वहां संचार व्यवस्था भी पूरी तरह से फेल नजर आई, जिससे समय पर मदद नहीं मिल पाई।

    कर्मचारियों की काबिलियत पर भी सवाल
    नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वाटर स्पोर्ट्स के मापदंडों के अनुसार वाटर स्पोर्ट्स सेंटर के सभी कर्मचारियों के पास लाइफ सेविंग टेक्निक्स का प्रमाणपत्र होना चाहिए। जो कर्मचारी सीधे तौर पर संचालन में शामिल नहीं हैं, उनके पास भी प्राथमिक उपचार और सीपीआर की ट्रेनिंग होनी चाहिए। सभी प्रमाणपत्रों की वैधता 2 साल की होती है और उसके बाद इन्हें रिन्यू कराना जरूरी है। बरगी में तैनात कर्मचारियों के पास वैध प्रमाणपत्र नहीं थे। वाटर स्पोर्ट्स में काम करने वाले कई कर्मचारियों के पुराने हो चुके प्रमाणपत्रों को भी रिन्यू नहीं करवाया गया था, जो एक बड़ी लापरवाही है।

    तय समय के बाद पानी में क्यों उतारा क्रूज
    नियमों के अनुसार बोटिंग और क्रूज का संचालन केवल दिन के उजाले में ही किया जाना चाहिए। सूर्य अस्त होने के बाद संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित होता है। हादसे वाले दिन 6 बजकर 7 मिनट तक क्रूज में पानी भरना शुरू हो गया था। यात्रियों ने अपने परिजनों को फोन करके इसकी जानकारी भी दी थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि नियमों के विपरीत अंधेरा होने के बाद भी क्रूज का संचालन किया जा रहा था।

    Share:

  • स्वच्छ और व्यवस्थित रखें घाट

    Mon May 4 , 2026
    निगमायुक्त ने किया तिलवारा घाट और गौशाला का निरीक्षण कर दिए निर्देश जबलपुर। नगर निगम आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार ने आज संस्कारधानी के सुप्रसिद्ध और आस्था के केंद्र तिलवारा घाट और गौशाला का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने घाट की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को घाट को अधिक सुव्यवस्थित व सुंदर […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved