
मुंबई. वर्तमान वैश्विक संकट (Global Crisis) और अनिश्चितताओं के बीच भारत (India) को अपनी घरेलू क्षमता बढ़ाने और रणनीतिक निर्भरता कम करने की आवश्यकता है। केंद्रीय मंत्री (Union Minister) जेपी नड्डा (JP Nadda) ने शनिवार को सूरत में आयोजित दो-दिवसीय ‘वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस’ (दक्षिण गुजरात) के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य हासिल करने के लिए मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण) क्षमता, आत्मनिर्भरता और सप्लाई चेन को मजबूत करना बेहद अहम है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि मजबूत अर्थव्यवस्था का अर्थ केवल विकास नहीं है, बल्कि इसमें लचीलापन और रणनीतिक स्वायत्तता का होना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा, “हालिया वैश्विक अनिश्चितता इस बात का संकेत है कि हमें संकट को अवसर में बदलना चाहिए और क्षेत्रीय सम्मेलनों के जरिए अपने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर अधिकतम ध्यान देना चाहिए”। नड्डा ने स्पष्ट किया कि देश के भीतर अधिक निर्माण और नवाचार करने तथा महत्वपूर्ण कमजोरियों को दूर करने की सख्त जरूरत है। ‘विकसित भारत’ के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए निरंतर उच्च विकास दर, औद्योगिक क्षमता का विस्तार, निर्यात में वृद्धि और वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत एकीकरण अनिवार्य है। इसके अलावा, उन्होंने सप्लाई चेन में आने वाली बाधाओं, तकनीकी नियंत्रणों और संसाधनों की रुकावटों जैसे गंभीर मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने का भी आह्वान किया।
दक्षिण गुजरात में 3.53 लाख करोड़ रुपये के 2,792 एमओयू साइन, 2.82 लाख नई नौकरियों के अवसर
गुजरात सरकार ने राज्य में निवेश और रोजगार सृजन की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल की है। सूरत में आयोजित दो दिवसीय ‘वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस’ (दक्षिण गुजरात) के दौरान 3,53,306 करोड़ रुपये के 2,792 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इन विशाल निवेश परियोजनाओं के लागू होने से आने वाले वर्षों में क्षेत्र के 2.82 लाख युवाओं के लिए सीधे रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। राज्य के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने सम्मेलन के समापन समारोह में यह अहम जानकारी साझा करते हुए इसे एक बड़ा मील का पत्थर करार दिया।
गांधीनगर से बाहर निकलकर क्षेत्रीय विकास पर जोर
यह सम्मेलन मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य निवेश और व्यापार के अवसरों को केवल राजधानी गांधीनगर तक सीमित न रखकर राज्य के हर क्षेत्र तक पहुंचाना है। इससे पहले उत्तर गुजरात के लिए मेहसाणा और सौराष्ट्र व कच्छ क्षेत्र के लिए राजकोट में भी इसी तरह के क्षेत्रीय आयोजनों को सफलतापूर्वक संपन्न किया जा चुका है। इन परियोजनाओं के आगामी तीन वर्षों के भीतर धरातल पर उतरने के साथ ही बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष रोजगार का सृजन होगा।
एमएसएमई और छोटे व्यापारियों के लिए वैश्विक अवसर
सरकार की इस रणनीति का मुख्य फोकस छोटे कारोबारियों को वैश्विक बाजारों और अंतरराष्ट्रीय अवसरों से सीधे जोड़ना है।
अंतरराष्ट्रीय भागीदारी: दक्षिण गुजरात के व्यापारियों को इस आयोजन में अमेरिका, कनाडा, सिंगापुर, जापान और रवांडा सहित 20 देशों के प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद करने और व्यापारिक चर्चाओं को आगे बढ़ाने का मौका मिला।
आखिरी व्यक्ति तक विकास: उपमुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल ‘पहली पंक्ति’ में बैठे उन लोगों तक संसाधन पहुंचाना नहीं है जिनके पास पहले से ही वैश्विक व्यापार की पहुंच है। इसके बजाय, सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी ‘आखिरी पंक्ति’ में बैठे हर छोटे व्यवसायी के सपनों को साकार करना और उन्हें सीधा लाभ पहुंचाना है।
आदिवासी क्षेत्रों और महिला रोजगार पर विशेष ध्यान
इस निवेश का एक बड़ा हिस्सा क्षेत्रीय और सामाजिक समानता लाने पर केंद्रित है। सरकार विशेष रूप से आदिवासी इलाकों में रोजगार पैदा करने वाले गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों को आक्रामक रूप से बढ़ावा दे रही है।
गारमेंट सेक्टर में बूम: इस योजना के तहत गारमेंट (परिधान) सेक्टर पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसमें सरकार को भारी सफलता मिली है। अगले दो वर्षों में प्रमुख गारमेंट उद्योगपतियों के सहयोग से डांग, तापी, नवसारी, वलसाड, भरूच और सूरत जैसे आदिवासी जिलों में 25,000 से अधिक महिलाओं को सीधा रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
सुरक्षित आवागमन: रोजगार से जुड़ी महिलाओं की सुविधा के लिए राज्य सरकार छोटे गांवों से विशेष बसों की व्यवस्था कर रही है, ताकि वे सुबह सुरक्षित तरीके से काम पर जा सकें और शाम को घर लौट सकें।
ओपन-डोर बैठकों से होगा समाधान
सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक तेज और उत्तरदायी बनाने के लिए प्रशासन ने कड़े कदम उठाने का आश्वासन दिया है। उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ये क्षेत्रीय सम्मेलन केवल नए निवेशकों को आकर्षित करने तक सीमित नहीं हैं। आने वाले दिनों में, यदि मौजूदा व्यापारियों और निवेशकों को व्यापार करने में किसी भी समस्या का सामना करना पड़ता है, तो जिम्मेदार सरकारी अधिकारी उनकी चिंताओं को सुनने और उनका त्वरित समाधान करने के लिए ‘ओपन-डोर’ बैठकें आयोजित करेंगे। कुल मिलाकर, राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है कि दक्षिण गुजरात में हुआ यह निवेश केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर वास्तविक विकास और रोजगार में तब्दील हो।
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