
वॉशिंगटन. अमेरिका (US) में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के एक बड़े फैसले के बाद अब उन कंपनियों (Companies) को राहत मिलने जा रही है, जिन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के लगाए टैरिफ (Tariffs) का भुगतान किया था। सोमवार से ऐसे कारोबारियों के लिए रिफंड (पैसे वापसी) की प्रक्रिया शुरू हो रही है।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?
दरअसल, कोर्ट ने अपने छह-तीन के फैसले में कहा था कि ट्रंप ने बिना संवैधानिक अधिकार के ये टैरिफ लगाए थे, जो कि कांग्रेस के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसके बाद अब अमेरिकी सरकार ने इन शुल्कों को लौटाने की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला लिया है। इस काम को अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (सीबीपी) संभाल रही है।
सोमवार सुबह से शुरू होगा ऑनलाइन पोर्टल
सीबीपी के मुताबिक, सोमवार सुबह आठ बजे से एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जाएगा, जहां आयात करने वाली कंपनियां और उनके एजेंट रिफंड के लिए आवेदन कर सकेंगे। कंपनियों को उन सभी सामानों का विवरण देना होगा, जिन पर उन्होंने टैरिफ चुकाया था। अगर आवेदन सही पाया गया, तो 60 से 90 दिनों के अंदर पैसा वापस मिल सकता है। हालांकि, यह प्रक्रिया काफी जटिल है और एक साथ सभी को पैसे नहीं मिलेंगे। सरकार इसे चरणों (फेज) में लागू करेगी, जिसमें पहले हाल के भुगतानों को प्राथमिकता दी जाएगी। तकनीकी कारणों या कागजी प्रक्रिया में गड़बड़ी के कारण कई मामलों में देरी भी हो सकती है।
इस फैसले का असर बहुत बड़ा है। आंकड़ों के अनुसार, करीब 3.3 लाख आयातकों ने 5.3 करोड़ से ज्यादा शिपमेंट पर कुल लगभग 166 अरब डॉलर (करीब लाखों करोड़ रुपये) का टैरिफ भरा था। फिलहाल पहले चरण में उन्हीं मामलों को शामिल किया गया है, जहां टैरिफ का अंतिम हिसाब नहीं हुआ था या हाल ही में भुगतान किया गया था।
रिफंड के लिए कंपनियों को सीबीपी के पास करना होगा रजिस्ट्रेशन
बता दें कि, रिफंड पाने के लिए कंपनियों को सीबीपी के इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सिस्टम में रजिस्ट्रेशन करना जरूरी है। 14 अप्रैल तक करीब 56,497 कंपनियां रजिस्टर कर चुकी थीं और उन्हें कुल 127 अरब डॉलर (ब्याज सहित) तक की वापसी मिल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका फायदा आगे चलकर आम ग्राहकों तक भी पहुंच सकता है, क्योंकि कई कंपनियां ये पैसा वापस मिलने पर ग्राहकों को भी राहत दे सकती हैं। हालांकि, यह प्रक्रिया धीरे-धीरे ही पूरी होगी।
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