
जम्मू. अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) तीन जुलाई से शुरू होने जा रही है। दुर्गम मानी जाने वाली इस यात्रा के दौरान इस बार मौसम (Weather) भी श्रद्धालुओं (pilgrims) की परीक्षा लेगा। विशेषज्ञों के अनुसार जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) और लद्दाख के पूर्वी हिस्से में मानसूनी बारिश के सामान्य से अधिक रहने की आशंका है। इसी के मद्देनजर यात्रा मार्ग पर तैयारी की जा रही है। सेना के साथ ही केंद्रीय गृह मंत्रालय भी तेजी से तैयारी में जुटा हुआ है।
श्रीनगर मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक मुख्तियार अहमद के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ और मानसून की तीव्रता तय करती है कि बारिश का रुख इस बार कैसा रहने वाला है। लंबे समय के पूर्वानुमान के आधार पर अभी तक जो तस्वीर बन रही है, उसके अनुसार जुलाई के पहले और दूसरे सप्ताह में सामान्य एवं सामान्य से अधिक बारिश होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
श्रद्धालुओं को इस दौरान सतर्क रहने की जरूरत है। बेहतर है कि मौसम विभाग की ओर से जारी एडवाइजरी का पालन करें। अमरनाथ यात्रा इस बार 57 दिन की रहने वाली है। यह आगामी 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन तक चलेगी। करीब दो माह तक श्रद्धालु अमरनाथ की पवित्र गुफा में स्थित बाबा बर्फानी के दर्शन कर सकेंगे।
अब भी कई फुट बर्फ, एक हजार कर्मचारी तैयारी में जुटे
अमरनाथ यात्रा मार्ग पर अभी सामान्य स्थानों पर सात से आठ फीट तक बर्फ जमी है। हिमस्खलन प्रभावित क्षेत्रों और ऊंचाई वाले इलाकों में यह 10 से 12 फीट तक मौजूद है। पहलगाम के 32 किलोमीटर दायरे के साथ ही चंदनबाड़ी में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के करीब एक हजार कर्मचारी बर्फ हटाने में जुटे हैं।
हमेशा इस कार्य में करीब 800 कर्मचारी लगाए जाते हैं। इसबार मौसम के रुख को देखते हुए यह संख्या बढ़ाई गई है। बर्फ हटाने के लिए बीआरओ स्नो कटर, स्नो ब्लोअर, अर्थमूवर, जेसीबी व लोडर की मदद ले रहा है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved