
राजगढ़। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में हर घर तक पानी पहुंचाने के दावों के बीच राजगढ़ जिले (Rajgarh District) के एक गांव की तस्वीर बेहद चिंताजनक सामने आई है। खिलचीपुर जनपद के फतेहपुर गांव (Fatehpur Village) में लोग आज भी पानी की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि गांव के ग्रामीणों को अपनी प्यास बुझाने के लिए राजस्थान (Rajasthan) की सीमा में बने कुएं पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
भीषण गर्मी और 45 डिग्री तापमान के बीच महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग रोज करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाने को मजबूर हैं। गांव की महिलाएं सिर पर पानी से भरे बर्तन रखकर लोकगीत गाते हुए लौटती नजर आती हैं।
वर्षों पुरानी है पानी की समस्या
खिलचीपुर जनपद की बावड़ीखेड़ा पंचायत के अंतर्गत आने वाले फतेहपुर गांव की आबादी करीब 200 बताई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में पानी की समस्या नई नहीं बल्कि वर्षों पुरानी है, जो गर्मी के मौसम में और गंभीर हो जाती है। गांव निवासी गजराज सिंह गुर्जर ने बताया कि बचपन से ही गांव में पानी का संकट देखते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई बार पंचायत स्तर पर समस्या उठाई गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया।
सरपंच के बयान से ग्रामीण नाराज
ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या बताने पर सरपंच की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। लोगों के मुताबिक, सरपंच ने कहा कि “क्या मैं तुम्हारे लिए अपनी जमीन बेच दूं, जब सरकार व्यवस्था करेगी तब टैंकर डलवाएंगे।” इस बयान के बाद ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई है।
पढ़ाई और दिनचर्या पर असर
ग्रामीण निकिता गुर्जर ने बताया कि गर्मी के दिनों में पानी की समस्या सबसे ज्यादा बढ़ जाती है। स्कूल खुलने पर बच्चों को पहले पानी लाने जाना पड़ता है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। ग्रामीणों ने गांव में डेम और ट्यूबवेल निर्माण की मांग की है। रेखाबाई और मांगीबाई ने बताया कि छोटे-छोटे बच्चे भी पानी ढोने के लिए मजबूर हैं। परिवार के सभी सदस्य दिन का बड़ा हिस्सा पानी लाने में ही खर्च कर देते हैं।
प्रशासन ने दिया समाधान का भरोसा
खिलचीपुर जनपद सीईओ गोविंद सिंह सोलंकी ने माना कि गांव में पानी की समस्या है। उन्होंने बताया कि नल-जल योजना पर काम चल रहा है, लेकिन अभी योजना पंचायत को हस्तांतरित नहीं हुई है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा।
वहीं, एसडीएम अंकिता जैन ने कहा कि मामले को संज्ञान में लिया गया है और जल निगम से चर्चा कर तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, ताकि ग्रामीणों को पानी के लिए दूसरे राज्य पर निर्भर न रहना पड़े।
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