नई दिल्ली! तेलंगाना पुलिस (Telangana Police) ने सिकंदराबाद कैंटोनमेंट से भारतीय सेना (Telangana Police) के हथियार और गोला-बारूद चोरी (Theft of weapons and ammunition) होने के मामले को सुलझा लेने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक, यह वारदात बाहर से घुसकर नहीं बल्कि अंदर के ही किसी व्यक्ति की मदद से अंजाम दी गई थी। चोरी किए गए हथियारों को हैदराबाद में एक स्थान से बरामद कर लिया गया है। हालांकि, जांच में सामने आए अन्य तथ्यों को फिलहाल सार्वजनिक नहीं किया गया है।
12 हथियार और 1,000 से ज्यादा कारतूस गायब थे
रिपोर्ट के मुताबिक, 31 अगस्त की सुबह सिकंदराबाद कैंटोनमेंट से कुल 12 हथियार गायब मिले थे। इनमें चार AK-203 असॉल्ट राइफल, सात पिस्तौल और एक INSAS राइफल शामिल थी। इसके अलावा 1,000 से अधिक राउंड गोला-बारूद और पैसिव नाइट-विजन दूरबीन की एक जोड़ी भी चोरी हुई थी।
हथियार और गोला-बारूद रखने वाले स्टोरेज रूम के ताले टूटे मिले थे। इसके बाद सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मल्काजगिरी कमिश्नरेट के बोल्लाराम पुलिस स्टेशन में मामले की शिकायत दर्ज कराई थी।
आखिरी बार 30 अगस्त को हुआ था सत्यापन
जांच के दौरान पता चला कि हथियारों और गोला-बारूद का आखिरी भौतिक सत्यापन 30 अगस्त की शाम करीब छह बजे किया गया था। यह सत्यापन ‘कोटे’ यानी कीपर ऑफ टेक्निकल इक्विपमेंट और बटालियन मैगजीन को बंद करने से पहले किया गया था।
पुलिस ने कैंटोनमेंट की सुरक्षा व्यवस्था और आर्मरी के रिकॉर्ड की भी जांच की। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, ‘कोटे’ में हमेशा सुरक्षा गार्ड तैनात रहते हैं। पूछताछ में गार्डों ने किसी तरह की जबरन घुसपैठ देखे जाने से इनकार किया था।
आर्मरी के रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल
जांच में आर्मरी के रिकॉर्ड में भी खामियां सामने आईं। पुलिस के मुताबिक, हथियारों का रिकॉर्ड नियमित रूप से अपडेट नहीं किया जा रहा था। नियमानुसार आर्मरी में रखे हथियारों का हर शाम हिसाब-किताब किया जाना चाहिए।
जांच के सिलसिले में 20 मद्रास रेजिमेंट की एक यूनिट के वरिष्ठ अधिकारी से भी पूछताछ की गई थी। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तेलंगाना पुलिस ने भी उनसे पूछताछ की। इसकी एक वजह यह थी कि आर्मरी की किताबें या रजिस्टर कथित तौर पर कई महीनों से ठीक तरीके से मेंटेन नहीं किए जा रहे थे।
पुलिस ने बताया- अंदर के व्यक्ति की मदद से हुई चोरी
अब तेलंगाना पुलिस ने पुष्टि की है कि हथियार चोरी का यह मामला ‘इनसाइड जॉब’ था। यानी वारदात में किसी ऐसे व्यक्ति की मदद ली गई, जिसे कैंटोनमेंट या हथियार रखने वाले क्षेत्र तक पहुंच हासिल थी।
पुलिस ने चोरी किए गए हथियारों को हैदराबाद में ट्रेस कर बरामद कर लिया है। हालांकि, इस पूरे मामले में अंदर से किसने मदद की, चोरी के पीछे क्या मकसद था और हथियारों को कहां ले जाने की योजना थी, इन सवालों पर जांच के बाकी निष्कर्ष अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
हथियारों की बरामदगी के बाद जांच एजेंसियों का फोकस अब इस बात पर है कि कैंटोनमेंट की सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देकर इतनी बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बाहर कैसे निकाला गया और इस वारदात में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
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