नई दिल्ली। दुनियाभर में एक बार फिर वायरस संक्रमण (Virus Infections) को लेकर चिंता बढ़ गई है। हाल ही में एक क्रूज जहाज पर हंता वायरस (Hantavirus Infection) से जुड़े मामलों के सामने आने के बाद (World Health Organization) ने इसे गंभीर संक्रामक बीमारी बताया है। हालांकि डब्ल्यूएचओ ने साफ किया है कि यह “अगला कोविड” नहीं है, लेकिन इसे हल्के में लेना भी खतरनाक हो सकता है।
डब्ल्यूएचओ की महामारी विशेषज्ञ Maria Van Kerkhove के मुताबिक, हंता वायरस कोई नया संक्रमण नहीं है और यह कई वर्षों से दुनिया में मौजूद है। हाल ही में एक क्रूज पर इससे जुड़ी मौतों के बाद कई देशों को सतर्क किया गया है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, इस संक्रमण से पहली मौत 11 अप्रैल को हुई थी। मृतक 70 वर्षीय डच नागरिक था। बाद में उसकी पत्नी की भी दक्षिण अफ्रीका में मौत हो गई। इसके अलावा एक जर्मन महिला में भी संक्रमण की पुष्टि हुई। इसके बाद डब्ल्यूएचओ ने 12 देशों को अलर्ट जारी किया।
हंता वायरस मुख्य रूप से चूहों से फैलने वाला संक्रमण है। संक्रमित चूहों के मल, मूत्र और लार के संपर्क में आने से यह वायरस इंसानों तक पहुंचता है। कई बार सूखे मल-मूत्र के कण हवा में मिल जाते हैं और सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
यह वायरस सीधे इंसानों के बीच बहुत कम फैलता है, जबकि COVID-19 की तरह कोरोना वायरस व्यक्ति से व्यक्ति में तेजी से फैलता था। यही वजह है कि कोरोना ने वैश्विक महामारी का रूप ले लिया, जबकि हंता वायरस के मामले सीमित रहते हैं।
शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे दिखाई देते हैं, जिनमें शामिल हैं:
संक्रमण बढ़ने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। मरीज को सांस लेने में दिक्कत, फेफड़ों में पानी भरना और किडनी से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में फेफड़ों से खून आने जैसी स्थिति भी देखी गई है।
फिलहाल भारत में हंता वायरस को लेकर किसी बड़े खतरे या अलर्ट की स्थिति नहीं है। हालांकि पहले भी देश में इसके कुछ मामले सामने आ चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और शोध पत्रों के अनुसार, साल 2008 में Vellore में संक्रमण के मामले मिले थे। वहीं 2016 में Mumbai में एक बच्चे की मौत भी इस वायरस से जुड़ी बताई गई थी।
विशेषज्ञों के अनुसार हंता वायरस से बचाव के लिए साफ-सफाई बेहद जरूरी है। खासकर:
डब्ल्यूएचओ प्रमुख Tedros Adhanom Ghebreyesus के अनुसार जिन देशों के नागरिक प्रभावित क्रूज जहाज से जुड़े थे, उनमें Canada, Germany, United Kingdom, United States, Singapore समेत 12 देश शामिल हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन लापरवाही भी नहीं बरतनी चाहिए।
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