
जबलपुर। अंतरराष्ट्र्रीय योग दिवस की तैयारियों के बीच विजय नगर स्थित महाराजा अग्रसेन वार्ड क्रमांक 35 के विशाल शिव पार्क में पिछले चार वर्षों से संचालित हो रहे नि:शुल्क योग केंद्र का मंच ध्वस्त किए जाने से योग साधकों में भारी नाराजगी व्याप्त है। योग गतिविधियों से जुड़े सैकड़ों लोगों ने इस कार्रवाई को जनभावनाओं के विपरीत बताते हुए विरोध दर्ज कराया है। योग गुरु पंडित रमाकांत पाला के नेतृत्व में यथार्थ परिवार के सैकड़ों योग साधक एकत्र हुए और भाजपा जिलाध्यक्ष को ज्ञापन सौंपकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की। ज्ञापन में कहा गया है कि जिस मंच पर पिछले चार वर्षों से नियमित योग, प्राणायाम और स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियां संचालित हो रही थीं, उसे अचानक ध्वस्त कर दिया गया, जिससे योग साधकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
योग गुरु पंडित रमाकांत पाला ने बताया कि इस नि:शुल्क योग केंद्र से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 500 से 1000 नागरिक जुड़े हुए हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में बुजुर्ग, महिलाएं, युवा और बच्चे यहां योगाभ्यास करने पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव योग को जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वर्षों से संचालित योग मंच को तोडऩा योग और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों की भावनाओं को आहत करने वाला कदम है।
साधकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से ठीक पहले मंच तोड़े जाने से योग गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। उनका आरोप है कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के मंच हटाने से नियमित योगाभ्यास करने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ज्ञापन के माध्यम से योग साधकों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि टूटे हुए मंच का शीघ्र पुनर्निर्माण कराया जाए। साथ ही योग केंद्र के लिए स्थायी एवं सुरक्षित स्थान सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो। साधकों ने यह भी मांग की है कि धूप, बारिश और अन्य मौसम संबंधी परेशानियों से बचाव के लिए पार्क में स्थायी शेड का निर्माण कराया जाए। योग साधकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो वे व्यापक जनआंदोलन करने को बाध्य होंगे। फिलहाल ज्ञापन सौंपे जाने के बाद सभी की निगाहें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।
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