नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा (Hindi Cinema) के सुनहरे दौर में अपनी मासूमियत, शानदार अभिनय (Excellent Acting) और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली अभिनेत्री नंदा (Nanda) की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी। पर्दे पर हमेशा मुस्कुराती और रोमांटिक किरदार निभाने वाली यह अभिनेत्री असल जिंदगी में बेहद दर्दनाक दौर (Painful Phase) से गुजरी। उन्होंने अपने करियर में सफलता, शोहरत और सम्मान सब कुछ हासिल किया, लेकिन निजी जिंदगी में उन्हें वह खुशी कभी नहीं मिल सकी जिसकी उन्होंने कल्पना की थी। उनकी प्रेम कहानी (Love Story) अधूरी रह गई और इसी दर्द के साथ उन्होंने पूरी जिंदगी अकेले बिताई।
नंदा ने बहुत कम उम्र में फिल्मी दुनिया में कदम रखा था। अपनी मेहनत और बेहतरीन अभिनय के दम पर उन्होंने जल्दी ही इंडस्ट्री में खास पहचान बना ली। 60 और 70 के दशक में उनका नाम हिंदी सिनेमा की सबसे सफल अभिनेत्रियों में गिना जाता था। उन्होंने कई बड़े सितारों के साथ काम किया और लगातार सुपरहिट फिल्में दीं। उस दौर में उनकी लोकप्रियता इतनी ज्यादा थी कि निर्माता-निर्देशक उन्हें अपनी फिल्मों में लेने के लिए इंतजार किया करते थे। सफलता के शिखर पर पहुंचने के बाद भी नंदा बेहद शांत और सरल स्वभाव की मानी जाती थीं।
करियर के दौरान ही उनकी मुलाकात मशहूर फिल्म निर्देशक और निर्माता मनमोहन देसाई से हुई। दोनों के बीच धीरे-धीरे नजदीकियां बढ़ीं और यह रिश्ता प्यार में बदल गया। मनमोहन देसाई पहले से शादीशुदा थे, लेकिन पत्नी के निधन के बाद वह पूरी तरह अकेले हो गए थे। इसी दौरान नंदा उनके और करीब आ गईं। दोनों एक-दूसरे को बेहद पसंद करने लगे और जिंदगी साथ बिताने का फैसला कर लिया। परिवार की सहमति के बाद दोनों ने बेहद सादगी से सगाई भी कर ली थी। उस समय नंदा अपनी नई जिंदगी को लेकर बेहद खुश थीं और शादी के कई सपने संजो रही थीं।
लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। सगाई के करीब दो साल बाद अचानक ऐसा हादसा हुआ जिसने नंदा की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। मनमोहन देसाई की अपने घर की बालकनी से गिरने के कारण दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने पूरे फिल्म जगत को झकझोर दिया था। वहीं नंदा पूरी तरह टूट गई थीं। जिस इंसान के साथ उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी बिताने का सपना देखा था, वह अचानक उनसे हमेशा के लिए दूर हो गया।
इस हादसे के बाद नंदा ने खुद को पूरी तरह अकेला कर लिया। उन्होंने दोबारा कभी शादी नहीं की और जीवन भर अपने प्यार की यादों के साथ रहीं। कहा जाता है कि मनमोहन देसाई को वह अपने दिल से पति मान चुकी थीं। यही वजह थी कि उनके निधन के बाद नंदा ने रंगीन कपड़े पहनना तक छोड़ दिया था और ज्यादातर समय सफेद कपड़ों में ही नजर आती थीं।
बॉलीवुड की चमक-दमक के पीछे छिपा यह दर्द आज भी लोगों को भावुक कर देता है। नंदा ने अपने अभिनय से जितना प्यार दर्शकों से पाया, उतना ही बड़ा अकेलापन उन्होंने निजी जिंदगी में सहा। उनकी कहानी इस बात की मिसाल है कि शोहरत और सफलता होने के बावजूद जिंदगी हर किसी के लिए आसान नहीं होती।
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