इंदौर न्यूज़ (Indore News)

3 माह में 20 साफ्टवेयर इंजीनियर, एमटेक, बीटेक, एमबीए से हुई लाखों की ठगी

टेलीग्राम पर क्रिप्टो करंसी में निवेश के नाम पर हुए शिकार, लड़कियां फैलाती हैं जाल

इंदौर, मेघश्याम आगाशे। सायबर ठगी (cyber fraud) का शिकार केवल कम पढ़े-लिखे लोग ही नहीं हो रहे हैं। इसमें बड़ी संख्या में साफ्टवेयर इंजीनियर, एमटेक, बीटेक, एमबीएस (Software Engineer, MTech, BTech, MBS) जैसे प्रोफेशनरों की भी है। सायबर सेल पर 3 माह में ऐसी 20 शिकायतें पहुंची हैं। उनसे लाखों की ठगी हुई है। किसी से 5 लाख तो किसी से 20 लाख की। इन सभी लोगों ने लड़कियों ने पहले सोशल मीडिया पर दोस्ती की और फिर उनको क्रिप्टो करंसी के नाम पर ठगी का शिकार बनाया।


यह खुलासा सायबर सेल एसपी जितेंद्रसिंह (Cyber ​​Cell SP Jitendra Singh) ने किया है। उनका कहना है कि पहले आम लोग ज्यादा ठगी का शिकार होते थे, क्योंकि वे ऑनलाइन से यूज टू नहीं थे। लेकिन अब समाज का ऐसा कोई वर्ग नहीं है जो ठगी का शिकार न हो रहा हो। उन्होने बताया कि 3 माह में उनके पास टेलीग्राम पर ठगी की 20 से अधिक शिकायते पहुची है। इन लोगों में चार-पांच साफ्टवेयर इंजीनियर है, जबकि बाकी के लोग एमटेक, एमबीए, एमसीए, सीए तो कुछ डॉक्टर भी है जो ठगी का शिकार हुए है। सभी को सायबर ठगोरों ने पांच लाख से बीस लाख तक का चूना लगाया है। एक नया ट्रेंड देखने में आ रहा है इन सभी से पहले व्हाट्सअप और फेसबुक पर लड़कियों ने दोस्ती की, फिर इनको टेलिग्राम पर ले गई। यहां उनके साथ चेटिंग करती रही। फिर उन्हे क्रिप्टो करंसी में निवेश का झांसा दिया। पहले छोटी राशी निवेश करवाकर फयदा भी करवाया। बाद में बढ़ी राशी निवेश कर ठग लिया।

पश्चिम बंगाल और आंध्रप्रदेश के खातों में गया पैसा

एसपी ने बताया कि अब तक की जांच में यह पता चला है कि यह पैसा पश्चिम बंगाल और आंध्रप्रदेश के बैक खातों में गया और फिर दूसरे खातों में ट्रांसफर हुआ है। एक मामले में पुलिस ने खाताधारी को पकड़ा भी था और टीम भी वहां भेजी थी। पता चला कि उसने यह खाता किसी को कमिशन पर किराए से दिया था। पुलिस टीम गिरोह तक पहुचने का प्रयास कर रही है।

50 शिकायतें रोजाना पहुंच रही हैं क्राइम ब्रांच के पास

देश के साथ पूरे प्रदेश में सायबर अपराध तेजी से बढ़ रहे है। इंदौर क्राइम ब्रांच की हेल्प लाइन की बात करे तो यहां रोजाना सायबर अपराध की 50 से अधिक शिकायतें पहुंच रही है। जिसके चलते यह आंकडा तीन गुना से अधिक बढ़ गया है। इसके लिए पुलिस जहां जागरूकता अभियान चला रही है वहीं समय पर पुलिस के पास पहुचने वाले लोगों को पैसा वापस भी करवा रही है। इस साल 50 से अधिक लोगों के लाखों रुपए वापस करवाने में पुलिस सफल रही है।

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