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32 निजी इंजीनियरिंग कॉलेज बंद, तीन साल में 41,526 सीटें खाली

October 05, 2026

  • गुणवत्ता और रोजगार की कमी से घटा छात्रों का रुझान, पिछले साल के मुकाबले खाली सीटें 28 फीसदी कम

इंदौर। मध्यप्रदेश में निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, 1 जनवरी 2018 से अब तक 32 निजी इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हो चुके हैं, वहीं 2023 से 2026 के बीच बीई और बीटेक की 41,526 सीटों पर दाखिले नहीं हुए। इंजीनियरिंग में पिछले साल की तुलना में खाली सीटें 28 प्रतिशत कम हुई हैं। इससे संकेत मिलता है कि छात्रों ने इंजीनियरिंग से दूरी नहीं बनाई, बल्कि वे संस्थान और विषय चुनते समय पढ़ाई, प्रशिक्षण और नौकरी की संभावना को ज्यादा महत्व दे रहे हैं।

संसाधन कमजोर तो घटे दाखिले
कई निजी संस्थानों में पर्याप्त शिक्षक, आधुनिक प्रयोगशालाएं और व्यावहारिक प्रशिक्षण नहीं होने से शिक्षा का स्तर प्रभावित हुआ। नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रिडिटेशन (एनबीए) और ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) के मानकों को पूरा करना भी कई कॉलेजों के लिए चुनौती रहा। जहां पढ़ाई के बाद नौकरी के अवसर कम मिले, वहां दाखिले भी घटते गए। कंपनियों की कैंपस में कम मौजूदगी ने भी छात्रों का भरोसा कमजोर किया।

सीएसई-एआई की ओर बढ़ा रुझान
छात्र अब कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (सीएसई), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डेटा साइंस जैसे विषयों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इन क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सामने आए हैं। दूसरी ओर, सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल जैसी शाखाओं में कई जगह सीटें खाली हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इनकी उपयोगिता कम नहीं हुई है। निर्माण, अधोसंरचना और विनिर्माण क्षेत्र में इन इंजीनियरों की जरूरत बनी हुई है। जरूरत इन पाठ्यक्रमों को नई तकनीक और उद्योग की जरूरतों से जोड़ने की है।

डिग्री के साथ कौशल जरूरी
आज छात्र केवल डिग्री नहीं, बल्कि कौशल, इंटर्नशिप और नौकरी की संभावना देख रहे हैं। इसलिए कॉलेजों को पढ़ाई के साथ उद्योग आधारित प्रशिक्षण पर ध्यान देना होगा। हर संस्थान का प्लेसमेंट रिकॉर्ड, शिक्षकों की स्थिति और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। इससे दाखिले से पहले छात्रों को सही फैसला लेने में मदद मिलेगी।

कॉलेज बंद होने की बड़ी वजह
शिक्षकों की कमी — योग्य फैकल्टी पर्याप्त नहीं।
लैब की कमी — व्यावहारिक प्रशिक्षण कमजोर।
कमजोर प्लेसमेंट — कंपनियों की भागीदारी कम।
चुनौती — एनबीए और एआईसीटीई की शर्तें
छात्रों की पसंद बदली
मांग में आगे: सीएसई, एआई, डेटा साइंस
कम दाखिले: सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल
प्राथमिकता: कौशल, इंटर्नशिप और रोजगार

सुधार के लिए पांच कदम
– पर्याप्त शिक्षक और आधुनिक लैब अनिवार्य हो।
– हर कॉलेज का प्लेसमेंट रिकॉर्ड सार्वजनिक हो।
– उद्योगों से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जाए।
– इंटर्नशिप को पढ़ाई का हिस्सा बनाया जाए।
– एआई, रोबोटिक्स और नए सॉफ्टवेयर शामिलकरें।

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