
इंदौर (Indore)। आज जिस विशाल स्वरूप में यहां मूर्ति विराजी हैं, उसकी कहानी भी ऐतिहासिक है, जब 2-2 रुपए चंदा कर पालदा के राजा की प्रतिमा (Statue of the King of Palda) को खजूर के पेड़ के नीचे बिना मंडप के विराजित किया जाता था। उस समय पालदा गांव हुआ करता था, लेकिन अब यहां गणेशजी की कृपा है और जिस तरह से मूर्ति की लंबाई बढ़ी है, उसी तरह इस क्षेत्र का विकास भी हुआ है। यह बात कल पालदा के राजा की महाआरती समापन पर अग्निबाण के प्रबंध संपादक राजेश चेलावत (Rajesh Chelawat) ने कही।
चेलावत ने बीते दिनों को याद करते हुए कहा कि आज से 30-35 साल पहले जब शहर में गणेशोत्सव का आयोजन धूमधाम से होता था, तभी पालदा के राजा की स्थापना हुई थी। यहां पहले गांव हुआ करता था और सडक़ें भी छोटी थीं और तभी से ही यहां खजूर के पेड़ के नीचे गणेशजी की प्रतिमा विराजित कर 10 दिनी उत्सव का शुभारंभ हुआ और उस वक्त बालीवुड के बड़े-बड़े कलाकारों ने गणेशोत्सव में शिरकत की। मालवा कला अकादमी द्वारा बालीवुड के इतने बड़े-बड़े कलाकारों को इस क्षेत्र में लाना और उनकी नृत्य निशा करवाना, किसी के बस की बात नहीं थी, लेकिन ये काम मनोज वर्मा ने कर दिखाया। उन्होंने कहा कि आज यहां कई ऐसे भक्त आए हैं, जो उस समय नहीं थे और कुछ ऐसे हैं, जो उस समय से इस उत्सव का हिस्सा बने हुए हैं।
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