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सराफा कारोबारी दहशत में… सरकारी खौफ के कारण खामोश रहने पर मजबूर

May 14, 2026

इंदौर। सालभर सोना ना खरीदने वाले की अपील करने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने सहित अन्य उपायों को आजमाने की सलाह नागरिकों को दे रहे हैं। दूसरी तरफ इंदौर सहित देशभर का सराफा कारोबार दहशत में है, क्योंकि सालभर में तो सभी छोटे-बड़े कारोबारियों का दम निकल जाएगा और करोड़ों कारीगर इस कारोबार से जुड़े हैं। इंदौर के सराफा में ही सन्नाटा है। मगर सरकारी खौफ के चलते कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। अलबत्ता कई कारोबारियों ने ये अवश्य कहा कि इंदौर में 20 हजार से अधिक कारीगर हैं, जिनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। सराफा के अलावा एमजी रोड सहित अन्य आभूषणों के जो बड़े-बड़े शोरूम हैं, वहां भी स्टाफ की छंटनी करनी पड़ेगी।


  • विगत कुछ वर्षों में इंदौर में सोने-चांदी, हीरे-जवाहरात के आभूषणों का बड़ा केन्द्र बन गया है और एमजी रोड पर तो बड़े-बड़े शोरूम खुल गए। जहां पर दीपावली, पुष्य नक्षत्र से लेकर अन्य त्योहारों पर खासी भीड़ रहती है। दूसरी तरफ पिछले कुछ समय से सोना-चांदी की कीमतों में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई। हालांकि बाद में दाम घट भी गए। पहले जीएसटी, उसके बाद कोविड सहित अन्य अवसरों पर भी सराफा कारोबारी संकट में आए और इस बार जहां केन्द्र सरकार ने सोने के आयात शुल्क में बढ़ोतरी कर दी, वहीं प्रधानमंत्री ने सालभर सोना ना खरीदने की देश की जनता से अपील कर दी, जिसके चलते सराफा कारोबारी दहशत में हैं, क्योंकि आने वाले हफ्तों में मांग में और गिरावट आने की आशंका है। दरअसल, बीते 6 महीने से रियल इस्टेट कारोबार के साथ-साथ सभी में मंदी है और ईरान, इजराइल, अमेरिका युद्ध के चलते यह आर्थिक संकट और गहरा गया है। चूंकि देश के प्रधानमंत्री ने ही इस तरह की अपील कर दी, जिसके चलते इंदौर के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में, जिनमें भोपाल, रतलाम, खंडवा, उज्जैन सहित अन्य सराफा कारोबारी भी घबराहट में हैं। सराफा बाजार में ही डेढ़ हजार से अधिक छोटी-बड़े दुकानें हैं और सराफा एसोसिएशन के भी साढ़े 800 से ज्यादा सदस्य हैं। पश्चिम बंगाल से आए अधिकांश कारोबारी यहां सराफा में काम करते हैं, जो कुछ समय पहले चुनाव के चलते गए थे और अब इस नए संकट के कारण अपने घर लौटने को मजबूर हैं। कई कारीगर तो चले भी गए। दरअसल, सराफा में ज्वेलरी कॉस्टिंग, पॉलिसिंग, डिजाइनिंग, सजावट से लेकर अन्य काम ये कारीगर ही चलते हैं। हालांकि मानसून और शादियों का सीजन ना रहने के दौरान सोने-चांदी के कारोबार में कमी आती है, मगर उसकी पूर्ति त्योहारी सीजन दीपावली, पुष्य नक्षत्र, करवा चौथ और शादियों के सीजन में हो जाती है। मगर अगर पूरे सालभर ही कारोबार ठंडा रहा तो जो बड़े-बड़े शोरूम और दुकानें हैं, उनके संचालन का खर्चा कहां से निकलेगा, जिसके चलते जहां कारीगरों को काम नहीं मिलेगा, तो वहीं स्टाफ सहित अन्य लोग भी बेरोजगार हो जाएंगे। पश्चिम बंगाल के ही 20 हजार से अधिक कारीगर इंदौर में ज्वेलरी निर्माण से जुड़े कार्यों में संलग्र हैं। छोटे और बड़ा सराफा में तो सन्नाटा है ही, वहीं एमजी रोड, एबी रोड सहित शहर के अन्य क्षेत्रों में पिछले दो-तीन वर्षों में ही सोने की ज्वेलरी, डायमंड सहित अन्य आभूषणों और सामग्री के बड़े-बड़े भव्य शोरूम खुल गए हैं, जिनमें सेल्समैन से लेकर अन्य सभी तरह का स्टाफ भी रहता है और कई बड़े शोरूम में तो ऐसे कर्मचारियों की संख्या 100 और उससे भी अधिक है। आने वाले दिनों में बिक्री में गिरावट के साथ ही कर्मचारियों की छंटनी भी करना पड़ेगी, क्योंकि एक शोरूम चलाने का महीने का खर्चा ही लाखों रुपए होता है, जिसमें भारी-भरकर बिजली बिल, लम्बे-चौड़े स्टाफ सहित उतनी ही मात्रा में स्टॉक भी रखना पड़ता है। देश के तमाम उद्योगपति भी मौजूदा संकट से परेशान हैं। मगर वे भी दबे-छुपे स्वरों में ही अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर पा रहे हैं और यही हाल सराफा कारोबारियों का भी हैं। सरकारी खौफ के चलते सब चुप हैं, क्योंकि बोलने पर इनकम टैक्स, ईडी सहित अन्य कार्रवाई की गाज गिर सकती है।

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