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उबलता इंदौर, 685 मेगावॉट पार हो गई इंदौर में बिजली मांग

May 14, 2026

  • प्रदेश की मांग 14 हजार मेगावॉट से अधिक दर्ज, 8 हजार मेगावॉट ज्यादा बिजली की उपलब्धता, फिर भी तकनीकी कारणों से कटौती भी
  • धड़ल्ले से चल रहे हैं एसी, पंखे, कूलर… बिक्री में भी उछाल

 

इंदौर। रात और दिन के तापमान में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी के साथ इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। उबलते इंदौर में दिन में जहां सन्नाटा सडक़ों पर पसरा नजर आता है, तो रात में भी गर्म हवाएं चल रही हैं। पंखे और कूलर तो हालांकि बेदम साबित हो गए, वहीं एसी भी धड़ल्ले से चल रहे हैं। नतीजतन बिजली की खपत भी बढ़ गई और इंदौर में 685 मेगावॉट से अधिक की मांग चल रही है, तो दूसरी तरफ पूरे प्रदेश में ही गर्मी का इन दिनों भीषण प्रकोप है, जिसके चलते 14 हजार मेगावॉट तक मांग पहुंच गई है। हालांकि उत्पादन कम्पनियों का कहना है कि फिलहाल 22 हजार मेगावॉट बिजली की उपलब्धता है। यानी मांग की तुलना में 8 हजार मेगावॉट बिजली ज्यादा मिल रही है।

वैसे तो सिंचाई के लिए सबसे अधिक बिजली की आवश्यकता पड़ती है। जब 18 से लेकर 19 हजार मेगावॉट तक प्रदेश में बिजली की मांग पहुंच जाती है। मगर अभी गर्मी बढऩे के साथ ही आपूर्ति में भी बढ़ोतरी हुई। हालांकि मांग से उपलब्धता ज्यादा है। बावजूद इसके तकनीकी व अन्य कारणों से शहर के अलग-अलग इलाकों में बिजली भी गुल रहती है और अभी दो दिन में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर रही है। 685 मेगावॉट अधिकतम मांग दर्ज की गई और 24 घंटे में डेढ़ करोड़ लाख यूनिट से अधिक बिजली की वितरण किया गया।


  • घर, दफ्तर, दुकान से लेकर सभी जगह धड़ल्ले से पंखे, कूलर और एसी चल रहे हैं। अभी तो इतनी भीषण गर्मी है कि पंखे-कूलर तो काम ही नहीं करते, वहीं एसी भी हाफ जाते हैं। यही कारण है कि गर्मियों के दिनों में घर-घर का बिजली बिल सालभर में सबसे अधिक आता है। शहर के पंखे, कूलर, एसी मार्केट में भी जोरदार बिक्री इन उत्पादकों की हो रही है। यहां तक कि कई मॉडल तो बाजार में गायब ही हो गए। यानी उपभोक्ताओं की मांग के अनुरूप व्यापारी सप्लाय नहीं कर पा रहे हैं। न्यू सियागंज, महारानी रोड, एमटीएच कम्पाउंड जैसे बड़े व्यावसायिक क्षेत्रों के अलावा शहरभर में मौजूद दुकानों, शोरूमों में भी पंखे, एसी, कूलर की मांग जबरदस्त बढ़ गई है।

    कूलर और पंखों से ठंडे किए जा रहे ट्रांसफार्मर
    गर्मी का असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि बिजली के उपकरणों पर भी देखा जा रहा है। अत्यधिक लोड और गर्मी के कारण ग्रिड और ट्रांसफार्मर उबलने लगे हैं। उपकरणों का तापमान नियंत्रित करने के लिए विभाग को विशेष जतन करने पड़ रहे हैं। कई स्थानों पर ग्रिड का टेंपरेचर मेंटेन करने के लिए अर्थिंग में लगातार पानी डाला जा रहा है, तो कहीं ट्रांसफार्मर को ठंडा रखने के लिए उनके पास बड़े कूलर और पंखे लगाए गए हैं।

    ट्रिपिंग और फाल्ट… 5 मिनट में बत्ती गुल बर्दाश्त नहीं
    एक तरफ जहां रिकॉर्ड आपूर्ति के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शहर के कुछ प्रमुख रिहायशी इलाकों में बिजली की लुकाछिपी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। राजबाड़ा, राजेंद्र नगर, राऊ के साथ विजयनगर, सेक्टर 114, सुखलिया, स्कीम नंबर 78 और महालक्ष्मी नगर के आसपास के क्षेत्रों में आए दिन बिजली गुल हो रही है। यहां के रहवासियों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बाद भी सही जवाब नहीं मिल रहा है। बेबस कर्मचारी और इंजीनियर भी ओवरलोडिंग के कारण हाथ खड़े करते नजर आ रहे हैं, जिससे इस चिलचिलाती गर्मी में जनता को घंटों बिना पंखे और कूलर के गुजारने पड़ रहे हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत तो रात के समय शहरवासियों को रहती है, जब अचानक 5-10 मिनट के लिए ट्रिपिंग होती है। पंखे कूलर बंद होने से लोग पसीना-पसीना हो जाते हैं और बिजली कंपनी को कोसते नजर आते हैं।

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