
नई दिल्ली । नैनीताल जिले (Nainital district)के लालकुआं से नेपाल(Lalkuan to Nepal) के बीच जो हाथी कॉरिडोर (Elephant Corridor)हैं, उनमें दस से अधिक स्थानों पर रेलवे क्रॉसिंग (Railway crossing)पड़ती हैं। राजाजी नेशनल पार्क से आने वाले हाथी इन्हीं क्रॉसिंगों से होते हुए चोरगलिया-खटीमा के रास्ते नेपाल में प्रवेश करते हैं। रेल यात्रियों की बुरी आदत हाथियों पर भारी पड़ रही है। चलती ट्रेन में कुछ भी खाकर खिड़की से बाहर फेंका जा रहा पॉलीथिन और प्लास्टिक कूड़ा हाथियों के पेट में जा रहा है।
रेलवे क्रॉसिंग पर दुर्घटना का शिकार हो रहे लगभग सभी हाथियों के पेट में पॉलीथिन और प्लास्टिक के कट्टे मिले हैं। हाथियों की मौत से परेशान वन विभाग अब उनके स्वास्थ्य को लेकर भी चिंतित है। नैनीताल जिले के लालकुआं से नेपाल के बीच जो हाथी कॉरिडोर हैं, उनमें दस से अधिक स्थानों पर रेलवे क्रॉसिंग पड़ती हैं। राजाजी नेशनल पार्क से आने वाले हाथी इन्हीं क्रॉसिंगों से होते हुए चोरगलिया-खटीमा के रास्ते नेपाल में प्रवेश करते हैं।
इस रूट पर पिछले आठ साल में ट्रैक पार करते हुए 11 हाथियों की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई है। जब इन हाथियों का पोस्टमार्टम किया गया, तो ज्यादातर वयस्क हाथियों के पेट में पॉलीथिन, प्लास्टिक की प्लेटें, प्लास्टिक के कट्टे और तेल वाले मोटे पॉलीथिन मिले।
इसे लेकर वन विभाग की चिंता बढ़ गई है। तराई केंद्रीय वन प्रभाग के डीएफओ यूसी तिवारी कहते हैं कि रेल हादसों में मारे गए हाथियों के पेट से पॉलीथिन आदि मिले हैं। हाथी पॉलीथिन में फेंके गए भोजन को निगल रहे हैं। टांडा रेंज में भी वेस्ट फेंकने के मामले सामने आ रहे हैं। समस्या से निपटने को ठोस रणनीति बनाई जाएगी।
लालकुआं-रुद्रपुर के बीच सबसे ज्यादा गंदगी
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, लालकुआं-रुद्रपुर के बीच सबसे ज्यादा गंदगी फेंकी जाती है। इसकी वजह यह है कि यात्री अपने गंतव्य तक पहुंचने से पहले यात्री कई बार खाने-पीने के बाद बचा हुआ सामान ट्रैक के किनारे फेंक देते हैं। हाथी पॉलीथिन आदि में लिपटे इस वेस्ट को सीधे निगल लेते हैं। जब हाथी ट्रैक पर इन वेस्ट पदार्थों के कारण रुक जाते हैं और दुर्घटना के शिकार भी बनते हैं।
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