
गुवाहाटी। असम में चल रही विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा है कि असम में कराए गए विशेष पुनरीक्षण का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना था कि सभी पात्र मतदाता सूची में शामिल हों और अपात्र नामों को हटाया जाए। तीन दिवसीय दौरे के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने बताया कि चुनाव से पहले मतदाता सूची का पुनरीक्षण कानूनन अनिवार्य है। असम में यह प्रक्रिया इसलिए कराई गई क्योंकि यह देश का एकमात्र राज्य है जहां राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है।
चुनाव तिथियों के निर्धारण पर पूछे गए सवाल के जवाब में ज्ञानेश कुमार ने कहा कि बीहू असम का अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। इसलिए समीक्षा बैठकों के दौरान विभिन्न पक्षों से प्राप्त सुझावों और प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि चुनाव कार्यक्रम तय करते समय राज्य की सांस्कृतिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाएगा। ज्ञानेश कुमार के मुताबिक, आयोग की प्राथमिकता स्वतंत्र, निष्पक्ष और सुचारु चुनाव कराना है, लेकिन इसके साथ ही स्थानीय परंपराओं और जनभावनाओं का सम्मान करना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी पक्षों से प्राप्त सुझावों का मूल्यांकन कर संतुलित और व्यावहारिक चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाएगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट किया कि चुनावी नियमों के अनुसार मतदान से पहले मतदाता सूची का अद्यतन जरूरी है। इसी के तहत 12 राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कराया गया, जबकि असम में विशेष पुनरीक्षण (SR) आयोजित किया गया। उन्होंने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया सफल रही है। राज्य के सभी जिलों से कुल लगभग 500 लोगों ने ही अपने नाम जोड़ने या किसी अन्य नाम को हटाने के लिए अपील दायर की है, जो इस बात का संकेत है कि सूची काफी हद तक सटीक है।
मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी भी तीन दिवसीय दौरे पर असम आए थे। इस दौरान आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। आयोग ने प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ बैठक कर मतदान केंद्रों, सुरक्षा व्यवस्था, मतदाता सूची और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ने भरोसा जताया कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराई जाएगी।
चुनाव आयोग ने प्रत्येक मतदान केंद्र पर अधिकतम 1,200 मतदाताओं की सीमा तय की है। इससे मतदान प्रक्रिया अधिक सुगम और व्यवस्थित होने की उम्मीद है। आयोग का मानना है कि इससे लंबी कतारों और भीड़भाड़ की समस्या कम होगी और मतदान प्रतिशत भी बढ़ सकता है।
पहली बार असम में मतदाताओं को मतदान केंद्र के प्रवेश द्वार पर अपने मोबाइल फोन रखने की अनुमति दी जाएगी। अब तक कई जगहों पर मोबाइल फोन ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहता था, जिससे मतदाताओं को असुविधा होती थी। नई व्यवस्था के तहत प्रवेश द्वार पर सुरक्षित जमा करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनाव आयोग का उद्देश्य केवल स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना ही नहीं, बल्कि मतदाताओं को अधिकतम सुविधा देना भी है। रंगीन फोटो, बड़े अक्षरों में नाम, सीमित मतदाता संख्या और मोबाइल जमा सुविधा जैसे कदम उसी दिशा में उठाए गए हैं। असम में चुनावी माहौल के बीच आयोग की ये घोषणाएं प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और मतदाता-हितैषी बनाने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही हैं।
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