
नई दिल्ली । पश्चिम एशिया(West Asia) में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार (International market) में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच भारत सरकार (Government of India)ने देशवासियों को बड़ी राहत(Big relief) दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा हालात के बावजूद फिलहाल पेट्रोल और डीजल(petrol and diesel) की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें करीब 16 प्रतिशत बढ़कर 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जबकि ब्रेंट क्रूड का भाव 85.41 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। इसके बावजूद केंद्र सरकार का कहना है कि भारतीय उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर नहीं पड़ने दिया जाएगा।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार भारत की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पहले से ही वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की तलाश कर ली है। एलपीजी के मामले में भारत केवल कतर पर निर्भर नहीं है। कतर से संभावित आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने भी भारत को गैस उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया है। इसके साथ ही भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ा दिया है, जबकि अमेरिका से भी एलपीजी की आपूर्ति बढ़ाई जा रही है। जानकारी के मुताबिक अमेरिका से अब भारत अपनी कुल एलपीजी खपत का लगभग 10 प्रतिशत आयात कर रहा है।
दरअसल पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के माहौल के बीच कतर ने अस्थायी रूप से अपना गैस उत्पादन बंद करने का फैसला लिया है, जिससे वैश्विक बाजार में गैस आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। भारत वर्तमान में करीब 195 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस का आयात करता है, जिसमें लगभग 60 एमएमएससीएम यानी करीब 30 प्रतिशत गैस कतर से आती है। सरकार का कहना है कि इस संभावित कमी को पूरा करने के लिए वैकल्पिक सप्लाई चैनल तैयार कर लिए गए हैं और जरूरत पड़ने पर गैस कंपनियां उद्योगों के लिए गैस आपूर्ति की प्राथमिकता तय कर सकती हैं।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि गैस की आपूर्ति में किसी तरह की कमी आती भी है तो उसका असर घरेलू उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा। पीएनजी और सीएनजी जैसे घरेलू उपयोग के लिए गैस की सप्लाई को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि उद्योगों के पास अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत उपलब्ध होते हैं, इसलिए उद्योगों के लिए सप्लाई में समायोजन किया जा सकता है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार देश में फिलहाल तेल और गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है। भारत के पास लगभग 25 दिनों की कच्चे तेल की जरूरत के बराबर स्टॉक उपलब्ध है, जबकि पेट्रोल और डीजल का भी लगभग 25 दिनों का भंडार सुरक्षित है। इसके अलावा सरकार लगातार विभिन्न देशों और ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं के संपर्क में है ताकि सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखा जा सके।
ईरान द्वारा होर्मुज जलमार्ग को बंद करने की दी गई धमकी को लेकर भी सरकार ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है। मंत्रालय के अनुसार भारत के कुल तेल आयात का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा इस मार्ग से आता है, जबकि बाकी 60 प्रतिशत अन्य समुद्री मार्गों से आता है। ऐसे में यदि इस मार्ग पर बाधा आती भी है तो भारत के पास अन्य विकल्प मौजूद हैं।
सरकारी रणनीतिकारों का मानना है कि यदि युद्ध कुछ समय और जारी रहता है तो कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, लेकिन संघर्ष थमने के बाद कीमतों में गिरावट आने की संभावना भी उतनी ही मजबूत है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। इसके साथ ही भारत अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी और ओपेक के साथ भी वैकल्पिक आपूर्ति को लेकर बातचीत कर रहा है। समुद्री जहाजों के सस्ते बीमा के मुद्दे पर भी अमेरिका की डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन से चर्चा जारी है ताकि सप्लाई चेन प्रभावित न हो और ऊर्जा आपूर्ति सुचारु बनी रहे।
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