
नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट (Middle East) में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बड़ा ऐलान किया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने घोषणा की है कि यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग (Sea Route) अब केवल अमेरिका, इजरायल, यूरोप और उनके पश्चिमी सहयोगी देशों के जहाजों के लिए पूरी तरह बंद (Closed) रहेगा। हालांकि इस फैसले से भारत जैसे कुछ देशों के लिए राहत की स्थिति बनती दिखाई दे रही है क्योंकि इन प्रतिबंधों में भारत (india)को शामिल नहीं किया गया है
ईरान की सरकारी प्रसारण संस्था के जरिए जारी इस घोषणा में आईआरजीसी ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका, इजरायल, यूरोप या उनके समर्थक देशों का कोई जहाज इस जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश करता है तो उस पर हमला किया जाएगा और उसे नष्ट कर दिया जाएगा। यह घोषणा ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए संयुक्त सैन्य अभियान के बाद क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है।
इससे पहले ईरान ने बुधवार को यह कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य केवल चीन के लिए बंद नहीं है। अब नए ऐलान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि भारत भी इस सख्त प्रतिबंध से बाहर है। ऐसे में भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र से तेल और ऊर्जा आपूर्ति जारी रहने की उम्मीद बनी हुई है।
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध की स्थिति में किसी भी देश को अपने समुद्री मार्गों के आवागमन को नियंत्रित करने का अधिकार होता है। इसी आधार पर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर यह सख्त रुख अपनाया है। आईआरजीसी ने अपने बयान में कहा कि युद्धकाल में इस्लामिक गणराज्य ईरान को इस रणनीतिक जलमार्ग पर नियंत्रण रखने का पूरा अधिकार है और वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। दुनिया भर में समुद्र के रास्ते होने वाले कुल तेल परिवहन का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। फारस की खाड़ी में स्थित कई बड़े तेल उत्पादक देशों के लिए यह समुद्र तक पहुंचने का मुख्य रास्ता है। दुबई का जेबेल अली बंदरगाह भी इसी क्षेत्र में स्थित है और इसे दुनिया के प्रमुख कंटेनर टर्मिनलों में गिना जाता है।
संघर्ष शुरू होने के बाद से ही इस जलमार्ग पर जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। समुद्री ट्रैकिंग वेबसाइटों के अनुसार कुवैत के पास और दुबई के तट से दूर कई तेल टैंकर और अन्य जहाज लंगर डालकर खड़े हैं और आगे की स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्से में ईरान का अपना नौसैनिक बेड़ा भी बंदर अब्बास बंदरगाह के पास तैनात है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है। तेल और गैस की कीमतों में भारी उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है और कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। हालांकि फिलहाल भारत जैसे देशों के लिए यह राहत की बात है कि ईरान ने अपने ताजा फैसले में उन्हें प्रतिबंधित देशों की सूची में शामिल नहीं किया है।
इतिहास में यह पहली बार माना जा रहा है जब होर्मुज जलडमरूमध्य को इस तरह से व्यावसायिक जहाजों के लिए आंशिक रूप से बंद किया गया है। यहां तक कि 1980 से 1988 के बीच चले ईरान इराक युद्ध के दौरान भी तेल टैंकरों पर हमलों के बावजूद इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बंद नहीं हुई थी।
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