
पश्चिम व पूर्वी रिंग रोड के साथ ग्रीन फील्ड के अधिग्रहित गांव को मिला बिक्री दर से मुआवजा
अधिगृहीत गांवों में 200 प्रतिशत तक बढ़ी कीमतें, अब आसपास के गांव भी आएंगे उसी दायरे में
इन्दौर। शहर (Indore) के आसपास के गांवों (villages) में अब घर या खेत की जमीन (lands) खरीदना पहले से कहीं ज्यादा महंगा होने जा रहा है। पूर्वी और पश्चिमी रिंग रोड इकोनॉमिक कॉरिडोर (Economic Corridor) के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान जिन गांवों में जमीनों की गाइडलाइन कीमतें 200 प्रतिशत तक बढ़ी थीं, अब प्रशासन उसी के आधार पर आसपास के गांवों की जमीनों की कीमतों को भी बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
जिला मूल्यांकन समिति ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर लिया है और अगले दो दिनों में होने वाली बैठक में इस पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। यदि प्रस्ताव पर मुहर लगती है तो शहर से लगे कई गांवों में जमीन की गाइडलाइन दरों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो जाएगी। दरअसल हाल ही में पूर्वी और पश्चिमी रिंग रोड इकोनॉमिक कॉरिडोर के निर्माण के लिए कई गांवों की जमीनों का अधिग्रहण किया गया था। उस समय सरकार ने जमीन मालिकों को बिक्री विलेख के आधार पर मुआवजा दिया था, जिसके चलते अधिग्रहित गांवों की जमीनों की कीमतें अचानक बढक़र करीब 200 प्रतिशत तक पहुंच गईं। इससे उन गांवों और आसपास के क्षेत्रों की जमीनों के बाजार भाव में भी बड़ा अंतर पैदा हो गया।इसी असमानता को खत्म करने के लिए अब मूल्यांकन समिति द्वारा गाइडलाइन दरों का युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है
70 प्रतिशत तक बढ़ेगी
समिति का मानना है कि जिन गांवों में अधिग्रहण के कारण जमीनों की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं, उनके आसपास के गांवों की गाइडलाइन दरें भी उसी अनुपात में बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि बाजार मूल्य और सरकारी गाइडलाइन में बड़ा अंतर न रहे। हालांकि यह भी तय किया गया है कि अधिग्रहित गांवों की तुलना में आसपास के गांवों की बढ़ोतरी थोड़ी कम रखी जाएगी, लेकिन उन्हें लगभग उसी वैल्यू के करीब लाने का प्रयास किया जाएगा। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक ग्रीन फील्ड सडक़ परियोजना से जुड़े गांवों में जमीनों की बिक्री दरों के आधार पर ही मुआवजा तय किया गया था। इसके बाद इन क्षेत्रों में जमीन की मांग तेजी से बढ़ी और बाजार कीमतों में उछाल आ गया। अब सरकार चाहती है कि इन इलाकों में गाइडलाइन दरें भी वास्तविक बाजार मूल्य के करीब लाई जाएं। मूल्यांकन समिति की बैठक में शहर के विभिन्न क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों की जमीनों की कीमतों का भी पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा। कई शहरी क्षेत्रों में भी गाइडलाइन दरों में बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं। बैठक के बाद शहर से लगे गांवों में जमीन की खरीद-फरोख्त पर स्टांप ड्यूटी भी बढ़ जाएगी, जिससे सीधे तौर पर राजस्व में बढ़ोतरी होगी वहीं दूसरी ओर जमीन मालिकों के लिए यह बढ़ोतरी फायदे का सौदा साबित हो सकती है, क्योंकि गाइडलाइन बढऩे से उनकी जमीनों का सरकारी मूल्य भी बढ़ जाएगा।
बिक्री छाट से दिया मुआवजा
इंदौर से उज्जैन के बीच प्रस्तावित 48 किमी लंबी ग्रीन फील्ड सडक़ परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन का मुआवजा देने के बाद अब आसपास के गांवों की कृषि भूमि की गाइडलाइन दरें बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है। जिले के करीब 20 गांवों के 662 किसानों को बिक्री छाट के आधार पर लगभग 626 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया। इन गांवों में गाइडलाइन दरें कम होने के कारण मुआवजा वास्तविक बिक्री के औसत मूल्य के आधार पर तय किया गया था। अब 2026–27 की कलेक्टर गाइडलाइन में इन गांवों और आसपास के क्षेत्रों में कृषि भूमि की दरों में 20 से 70 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव है।ज्ञात हो कि जिले की करीब 4840 लोकेशनों में से लगभग 3000 स्थानों पर 10 से 170 प्रतिशत तक वृद्धि संभावित है।
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