
इंदौर। आयकर विभाग द्वारा पैन कार्ड के नियमों में बदलाव किए जाने के कारण कामकाज रुक गया है। नए वित्त वर्ष में जो नई कंपनियां बनाई गईं उनका पैन कार्ड नहीं बन पा रहा है, जिसके चलते इन कंपनियों का कारोबार शुरू नहीं हो पा रहा है। आयकर विभाग द्वारा 1 अप्रैल से शुरू हुए नए वित्त वर्ष में पैन कार्ड के नियमों में एक बड़ा बदलाव किया गया है। अब तक जन्मतिथि के दस्तावेज और निवास के दस्तावेज के रूप में जिस आधार कार्ड को माना जाता था उसे अब इन दोनों कार्यों के दस्तावेज के रूप में मानने से इनकार कर दिया गया है।
यह अनिवार्य कर दिया गया है कि हर व्यक्ति को अपने आधार कार्ड को पैन कार्ड से लिंक करना होगा, लेकिन आधार कार्ड किसी भी आवश्यकता की पूर्ति का दस्तावेज नहीं होगा। आयकर विभाग द्वारा बनाए गए नए नियम के अनुसार अब जन्मतिथि के दस्तावेज के रूप में व्यक्ति को अपनी हाईस्कूल की मार्कशीट अथवा जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। इसके साथ ही निवास के प्रमाण पत्र के रूप में अन्य दस्तावेजों के साथ पासपोर्ट को मान्य किया गया है। अब तक हमेशा यह होता था कि नए पैन कार्ड के लिए आवेदन किए जाने के बाद एक सप्ताह के अंदर पैन कार्ड बनकर आ जाता था, जिससे व्यक्ति को कोई परेशानी नहीं होती थी।
सीए कीर्ति जोशी ने बताया कि अमूमन नए वित्त वर्ष पर बड़ी संख्या में नई कंपनी अथवा फर्म बनाई जाती हैं। इसके साथ ही उसका पैन कार्ड लेने के लिए आवेदन किया जाता है। यह पैन कार्ड आने पर उसके आधार पर जीएसटी नंबर लिया जाता है और फिर उक्त नवनिर्मित कंपनी अथवा फर्म द्वारा कारोबार शुरू किया जाता है। इस बार नए वित्त वर्ष में जो नई कंपनी अथवा फर्म बनाई गई उनके द्वारा किए गए पैन कार्ड के आवेदन अटक गए हैं। महीना बीतने आ रहा है, लेकिन अभी तक पैन कार्ड नहीं आ पाए हैं। ऐसी स्थिति में उक्त नई कंपनी और फर्म को जीएसटी नंबर हासिल करना और अपने कारोबार को शुरू करना मुश्किल हो गया है। इसके कारण व्यापारिक क्षेत्र में ऊहापोह की स्थिति बन गई है।
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