
नई दिल्ली. मार्च के मध्य में एक बार फिर ज्योतिष (Astrology) के अनुसार एक खास समय शुरू होने जा रहा है. जब सूर्य (Sun) अपनी राशि बदलकर मीन (Pisces) राशि में प्रवेश करते हैं, तब खरमास (Kharmas) की शुरुआत होती है. हिंदू पंचांग में इस अवधि को मांगलिक कार्यों के लिए शुभ नहीं माना जाता. इसलिए इस समय विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ संस्कार कुछ समय के लिए रोक दिए जाते हैं.
14 मार्च मध्यरात्रि से शुरू होगा खरमास
ज्योतिष के अनुसार भगवान सूर्य 14 मार्च, शनिवार की मध्यरात्रि को मीन राशि में प्रवेश करेंगे. सूर्य के मीन राशि में आते ही लगभग एक महीने तक चलने वाला खरमास शुरू हो जाएगा. सूर्य जब भी देव गुरु बृहस्पति की राशियों धनु और मीन में प्रवेश करते हैं, तब यह अवधि खरमास कहलाती है. इस दौरान शादी-विवाह जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते.
20 अप्रैल से फिर शुरू होंगे विवाह मुहूर्त
इस वर्ष दूसरा खरमास 14 मार्च की मध्यरात्रि 1 बजकर 4 मिनट से शुरू होगा. इसके साथ ही विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों पर अस्थायी रोक लग जाएगी. यह अवधि लगभग एक महीने तक रहेगी. इसके बाद 20 अप्रैल से फिर से विवाह के शुभ मुहूर्त शुरू हो जाएंगे, जो 7 जुलाई तक मिलेंगे.
खरमास में क्यों नहीं किए जाते शुभ कार्य
मान्यता है कि खरमास के दौरान सूर्य की गति धीमी हो जाती है. जब सूर्य देव बृहस्पति की राशियों धनु या मीन में होते हैं, तब उनकी ऊर्जा स्थिर मानी जाती है. शुभ कार्यों के लिए सूर्य का मजबूत स्थिति में होना जरूरी माना जाता है. इसलिए इस समय विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ और नामकरण जैसे संस्कार नहीं किए जाते.
ग्रहों की स्थिति को माना जाता है कारण
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस समय ग्रहों की शुभ दृष्टि उतनी प्रभावी नहीं रहती. माना जाता है कि ग्रहों की ऊर्जा कम होने से नए कामों के अच्छे परिणाम नहीं मिलते. यही वजह है कि परंपरा के अनुसार खरमास के दौरान सभी मांगलिक कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है.
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