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इंदौर: मंदिरों की भोजनशाला पर नहीं गैस सिलेंडर की डिलीवरी का असर

March 14, 2026

खजराना और रणजीत हनुमान मंदिर में पीएनजी तो नंदानगर के सांई मंदिर में बायो कोल से बनती है भोजन प्रसादी

इंदौर। संजीव मालवीय।
कमर्शियल गैस सिलेंडरों (Commercial gas cylinders) की बुकिंग बंद (Bookings Closed) होने के बीच राहतभरी खबर है कि शहर के बड़े मंदिरों में चलने वाली भोजनशालाएं (Dining Halls) इससे प्रभावित नहीं होंगी और रोज की तरह वहां भोजन प्रसादी परोसी जाएगी। दो भोजनशाला में पीएनजी (PNG) तो एक भोजनशाला में बायो कोल से भोजन बनाया जा रहा है, जो अपने आप में ईंधन बचत का एक उदाहरण है।


  • शहर में बड़े स्तर पर छोटी-छोटी चाय-नाश्ते की दुकानों से लेकर बड़े होटलों में मिलने वाले खाने पर असर पड़ रहा है। अधिकांश लोगों ने तो अपनी दुकानें बंद कर दी हैं, क्योंकि कमर्शियल गैस सिलेंडर की डिलीवरी कंपनियों ने देना बंद कर दी है। जब तक ईरान और इजराइल के बीच तनावपूर्ण हालात रहेंगे और युद्ध चलता रहेगा, तब तक एलपीजी सिलेंडरों की बुकिंग सामान्य होने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर घरेलू गैस सिलेंडरों की लेकर भी मारामारी मची है। संभावित किल्लत के चलते घरेलू उपभोक्ताओं की डिमांड बढ़ गई है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की डिलीवरी में किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं है। शहर के प्रसिद्ध मंदिरों में संचालित होने वाली भोजनशालाओं में भी बराबर भोजन बन रहा है। इनमें खजराना मंदिर और रणजीत हनुमान मंदिर में अवंतिका गैस कंपनी का पीएनजी कनेक्शन है, जिसके कारण एलपीजी सिलेंडर की आवश्यकता नहीं होती है। इसका परिणाम यह रहा कि जब से कमर्शियल गैस सिलेंडर की बुकिंग बंद हुई है, एक दिन भी ऐसा नहीं रहा कि भोजनशाला में अवकाश रखना पड़ा हो या भोजन व्यवस्था प्रभावित हुई हो। दोनों मंदिरों में सुबह और शाम रोज की तरह खाना खिलाया जा रहा है। रणजीत हनुमान मंदिर के दीपेश व्यास के अनुसार अभी तक तो किसी तरह की परेशानी नहीं है और आगे भी कोई परेशानी नहीं आएगी।

    चार साल से बन रहा बायो कोल से भोजन
    नंदानगर सांई मंदिर में वर्षों से अन्न क्षेत्र चलाया जा रहा है। पहले यहां भोजन गैस सिलेंडर और लकड़ी की भ_ियों पर बनाया जाता था, लेकिन पिछले चार साल से यहां बायो कोल से भोजन बनाया जा रहा है। मंदिर समिति के विनयकुमार मित्तल ने बताया कि बायो कोल में प्रमुख रूप से सोयाबीन और मूंगफली के वेस्ट का उपयोग होता है, जो कि पर्यावरण हितैषी है। इसके दहन में धुआं और कार्बन उत्सर्जन बहुत कम होता है। वहीं इसकी लागत भी गैस से आधी से भी ज्यादा कम होती है। वर्तमान परिस्थितियों में बहुत से होटल और केटरिंग व्यवसाय से संबंधित लोग हमारे यहां इसे देखने और समझने आ रहे हैं। यहां केवल रोटियां बनाने के लिए गैस भ_ी का इस्तेमाल किया जाता है, जिसका बैकअप मंदिर समिति के पास है। फिलहाल तो एक सप्ताह के लिए सिलेंडर की समस्या नहीं है।

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