
नई दिल्ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (National Investigation Agency) ने म्यांमार में जातीय संघर्ष समूहों (ethnic conflict groups) को हथियार (weapons) और आतंकी प्रशिक्षण (terrorist training) देने के आरोप में एक अमेरिकी नागरिक (American citizen) Matthew Vandyk और यूक्रेन के छह नागरिकों (Ukrainian nationals) को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये सभी वीजा (visa) लेकर भारत आए और मिजोरम के रास्ते म्यांमार पहुंचे, जहां उन्होंने जातीय संघर्ष समूहों से संपर्क किया जो भारत में विद्रोही संगठनों (rebel organizations) से जुड़े हैं।
गिरफ्तार किए गए यूक्रेनी नागरिक हैं हुरबा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफनकीव मारियन, होंचारुक मैक्सिम और कामिंस्की विक्टर। तीन को दिल्ली और तीन को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया, जबकि अमेरिकी नागरिक को कोलकाता से पकड़ा गया। सातों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद विशेष अदालत ने 11 दिन के लिए एनआईए रिमांड पर भेज दिया।
एनआईए ने आरोप लगाया कि ये सभी सीधे अज्ञात आतंकियों के संपर्क में थे और भारतीय विद्रोही समूहों को हथियार और प्रशिक्षण मुहैया करा रहे थे। एजेंसी ने बताया कि आरोपियों की गतिविधियां भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं। कोर्ट ने मामले को सामान्य नहीं मानते हुए यूएपीए की धारा-18 लागू की और सभी पर आतंकी साजिश में सहायता का मामला दर्ज किया।
यूक्रेन ने गिरफ्तारी पर विरोध जताया। भारत में यूक्रेन के राजदूत डॉ. ओलेक्सांद्र पोलिशचुक ने विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज से मुलाकात की और तुरंत रिहाई की मांग करते हुए विरोध पत्र सौंपा। दूतावास हिरासत की स्थिति और कारणों को समझने के लिए भारत के संबंधित अधिकारियों से संपर्क में है।
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक पहले से सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त कर चुका है और उसने लीबिया, सीरिया और यूक्रेन जैसे युद्धग्रस्त क्षेत्रों में भी काम किया है। एनआईए ने कहा कि यूरोप से भारत के रास्ते म्यांमार ड्रोन की बड़ी खेप पहुंची और यह सभी गतिविधियां गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा खतरा हैं।
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