
नई दिल्ली। ईरान और इज़राइल (Iran and Israel) के बीच चल रहे युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) लगभग बंद हो गया है, जिससे दुनिया भर में गैस और तेल की आपूर्ति बुरी तरह बाधित हुई है। इस जलमार्ग से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल और LNG गुजरता है। इस संकट के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत युद्ध पूर्व के 65 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है।
इस ‘ग्लोबल ऑयल क्राइसिस’ (Global Oil Crisis 2026) और आर्थिक मंदी से बचने के लिए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के 32 सदस्य देशों ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अपने रणनीतिक आपातकालीन भंडार (Strategic Oil Reserves) से 40 करोड़ (400 मिलियन) बैरल तेल जारी करने का फैसला किया है।
क्या होता है स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR)?
स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) कच्चे तेल का एक आपातकालीन भंडार होता है, जिसे किसी देश की सरकार द्वारा सरकारी सुविधाओं में सुरक्षित रखा जाता है। इस तेल भंडार का इस्तेमाल युद्ध, प्राकृतिक आपदाओं या आर्थिक संकट जैसी आपातकालीन स्थितियों में किया जाता है ताकि देश में ईंधन की कमी न हो।
दुनिया में किसके पास है सबसे ज्यादा तेल का बैकअप?
1. चीन (China)
चीन IEA का सदस्य नहीं है, लेकिन उसके पास दुनिया का सबसे बड़ा रणनीतिक तेल भंडार है। हालांकि चीन आधिकारिक तौर पर अपने भंडार के आंकड़े जारी नहीं करता है, लेकिन एनर्जी एनालिटिक्स फर्म वोर्टेक्सा के अनुसार, 2025 के अंत तक चीन के पास 1.13 बिलियन (113 करोड़) बैरल का रिकॉर्ड भंडार था। चीनी रिफाइनर कंपनियां अब इस रिजर्व का इस्तेमाल करने के लिए सरकार से अनुमति मांग रही हैं।
2. अमेरिका (USA)
IEA सदस्यों में अमेरिका के पास सबसे बड़े भंडारों में से एक है। अमेरिका के पास 41.5 करोड़ (415 मिलियन) बैरल कच्चे तेल का भंडार है। यह भंडार अमेरिका के लगभग 200 दिनों के शुद्ध कच्चे तेल के आयात को कवर कर सकता है। वर्तमान संकट से निपटने के लिए अमेरिका अपने भंडार से 17.2 करोड़ बैरल तेल जारी कर रहा है।
3. जापान (Japan)
ऊर्जा के लिए आयात पर निर्भर जापान के पास भी दुनिया के सबसे बड़े आपातकालीन भंडारों में से एक है। 2025 के अंत तक देश के पास लगभग 47 करोड़ (470 मिलियन) बैरल तेल का सुरक्षित भंडार था। जापान का यह भंडार उसकी 254 दिनों की घरेलू खपत को पूरा करने के लिए काफी है। संकट को देखते हुए जापान 8 करोड़ बैरल तेल जारी कर रहा है।
4. यूनाइटेड किंगडम (UK) और यूरोपीय देश
UK, ब्रिटेन के पास लगभग 3.8 करोड़ बैरल कच्चा तेल और 3 करोड़ बैरल रिफाइंड उत्पाद हैं। यह रिज़र्व लगभग 90 दिनों तक चल सकता है।
जर्मनी: 11 करोड़ बैरल कच्चे तेल और 6.7 करोड़ बैरल पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार है।
फ्रांस: 2024 के आंकड़ों के अनुसार, फ्रांस के पास 12 करोड़ बैरल का सुरक्षित भंडार है।
स्पेन और इटली: स्पेन के पास 15 करोड़ बैरल रिज़र्व है (जिसमें से वह 1.15 करोड़ बैरल जारी कर रहा है), जबकि इटली के पास 90 दिनों के आयात के बराबर (लगभग 7.6 करोड़ बैरल) का भंडार है।
भारत के पास कितने दिनों का है बैकअप?
भारत सरकार भी तेल की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति बाधित होने की चिंताओं पर पैनी नजर रखे हुए है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी के अनुसार, भारत का वर्तमान स्ट्रैटेजिक ऑयल रिज़र्व लगभग 9.5 दिनों की आपूर्ति के लिए डिज़ाइन किया गया है। वर्तमान में यह अपनी कुल क्षमता (5.33 मिलियन टन) का लगभग 64% (3.372 मिलियन टन) भरा हुआ है।
अगर तेल विपणन कंपनियों (Oil Marketing Companies) के पास मौजूद भंडार को भी मिला लिया जाए, तो भारत के पास कुल 74 दिनों की खपत के लिए पर्याप्त तेल मौजूद है। भारत सरकार ने अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए ओडिशा के चांदीखोल और कर्नाटक के पादुर में 6.5 मिलियन टन क्षमता वाले अतिरिक्त कमर्शियल-कम-स्ट्रैटेजिक रिज़र्व के विकास को मंजूरी दी है। इसके अलावा, भारत ने जोखिम कम करने के लिए अमेरिका, नाइजीरिया, ब्राजील और कनाडा सहित 41 देशों से तेल खरीदना शुरू कर दिया है।
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