
नई दिल्ली। महिला आरक्षण (women’s reservation)से जुड़े संभावित संशोधन बिल को लेकर केंद्र सरकार(Central Government) की रणनीति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, संसद के मौजूदा सत्र में इस विधेयक को पेश किए जाने की संभावना अब काफी कम हो गई है। दरअसल, सरकार लोकसभा (Parliament)सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने और उनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने पर विचार कर रही है, लेकिन इसके लिए व्यापक राजनीतिक सहमति जरूरी मानी जा रही है।
सभी दलों से सहमति बनाना बड़ी चुनौती
इस मुद्दे पर Amit Shah ने एनडीए के सहयोगी दलों और कुछ विपक्षी नेताओं से चर्चा भी की है, लेकिन अभी तक Indian National Congress और All India Trinamool Congress जैसे प्रमुख दलों से बातचीत पूरी नहीं हो पाई है। ऐसे में सरकार जल्दबाजी में बिल लाने के बजाय सभी पक्षों से सहमति बनाने पर जोर दे रही है, ताकि भविष्य में किसी तरह का राजनीतिक विवाद न खड़ा हो।
संसद सत्र छोटा होने की संभावना
सूत्रों के मुताबिक, संसद का मौजूदा सत्र निर्धारित समय से पहले स्थगित किया जा सकता है, हालांकि सत्रावसान नहीं किया जाएगा। इसका मतलब है कि सरकार बाद में इसी सत्र को फिर से बुला सकती है। बताया जा रहा है कि अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनावों के बाद सरकार इस बिल को पेश करने पर विचार कर सकती है।
चुनावों के बाद आगे बढ़ेगा मामला
सरकार की रणनीति साफ तौर पर चुनावों के नतीजों से भी जुड़ी नजर आ रही है। पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के परिणाम 4 मई को आएंगे, जिसके बाद राजनीतिक समीकरण स्पष्ट होंगे। ऐसे में सरकार उस समय बिल को पेश कर बेहतर समर्थन हासिल करने की कोशिश कर सकती है।
फिलहाल आधिकारिक बयान का इंतजार
हालांकि, इस पूरे मामले पर सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन संकेत यही हैं कि महिला आरक्षण संशोधन बिल को लेकर सरकार जल्दबाजी नहीं करना चाहती और व्यापक सहमति बनने के बाद ही इसे संसद में लाया जाएगा।
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