
नर्मदापुरम। नर्मदापुरम (Narmadapuram) जिले की बानापुरा रेंज (Banapura Range) की चिचवानी बीट से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने वन विभाग (Forest Department) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन लोगों पर जंगल की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, वही कर्मचारी अवैध कटाई (Illegal Logging) जैसे गंभीर अपराध में शामिल पाए गए हैं।
जानकारी के अनुसार, सागौन के करीब 116 पेड़ों की अवैध कटाई करवाई गई। कटे हुए लकड़ी को डिपो के नाम पर पिकअप वाहन में भरकर बेचा गया। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे खेल में कोई बाहरी माफिया नहीं, बल्कि विभाग के ही कर्मचारी शामिल थे। मामले का खुलासा होते ही वन विभाग में हड़कंप मच गया। जांच के लिए डीएफओ गौरव शर्मा, एसडीओ अनिल विश्वकर्मा सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। मौके पर अवैध कटाई का बड़ा स्तर देखकर अधिकारी भी स्तब्ध रह गए।
जांच के दौरान एसडीओ अनिल विश्वकर्मा ने सुखतवा सर्किल के नाकेदार महिपाल सिंह यादव, रूपेश साहू और दो चौकीदारों को पूछताछ के लिए बानापुरा रेंज कार्यालय बुलाया। पूछताछ में चौकीदारों ने वनरक्षकों के नाम उजागर किए, जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया।
हालांकि, खुद को घिरता देख आरोपित वनरक्षकों ने जांच अधिकारी पर ही मारपीट और प्रताड़ना के आरोप लगा दिए। नाकेदार महिपाल सिंह यादव ने आरोप लगाया कि पूछताछ के दौरान उन्हें गालियां दी गईं और डंडे से पीटा गया। उन्होंने सिवनीमालवा थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने मेडिकल परीक्षण कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, चौकीदारों ने भी आरोप लगाया कि उन्हें दो दिन तक बंधक बनाकर रखा गया और बिजली का करंट देकर प्रताड़ित किया गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने मामले को और ज्यादा उलझा दिया है। एक तरफ अवैध कटाई का गंभीर आरोप है, तो दूसरी ओर जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। डीएफओ ने प्राथमिक जांच के आधार पर तीन वनरक्षकों को निलंबित कर दिया है और चौकीदारों को भी आरोपी बनाया गया है। उनका कहना है कि जो भी कर्मचारी इस अवैध कटाई में शामिल पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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