
नई दिल्ली । भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक स्तर पर मतभेद सामने आए हैं। सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) एस. चोकलिंगम ने पिछले वर्ष नवंबर में आयोग को पत्र लिखकर चेतावनी दी थी कि इस प्रक्रिया के लिए तय समय सीमा अत्यंत कम है। उन्होंने सुझाव दिया था कि जिन राज्यों में तत्काल चुनाव नहीं हैं, वहां इस कार्य को अधिक समय देकर पूरा किया जाना चाहिए।
पहले भी सामने आ चुका है आयोग और अधिकारी के बीच तनाव
हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी अनुराग यादव के बीच तीखी बहस का मामला भी सामने आया था। इसके बाद आयोग ने उन्हें पश्चिम बंगाल के कूच बिहार में चुनाव पर्यवेक्षक पद से हटा दिया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, समीक्षा बैठक के दौरान मतदाता संख्या से जुड़े एक सवाल पर जवाब में देरी और उसके बाद हुई तीखी नोकझोंक को अनुशासनहीनता माना गया।
महाराष्ट्र की चिंता
महाराष्ट्र, जो देश के सबसे बड़े मतदाता आधार वाले राज्यों में से एक है, ने SIR प्रक्रिया को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। 2024 के लोकसभा चुनावों में राज्य में 9 करोड़ से अधिक मतदाता दर्ज थे। सीईओ ने 2001-02 के पुनरीक्षण अभियान का हवाला देते हुए कहा कि उस समय पूरी प्रक्रिया को पूरा करने में लगभग 13 महीने लगे थे। उनका तर्क है कि मतदाता सूची को केवल अपडेट करना ही नहीं, बल्कि उसे त्रुटिहीन बनाना भी आवश्यक है, जिसके लिए पर्याप्त समय चाहिए।
पश्चिम बंगाल में विवाद का असर, लाखों नाम हटे
इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा असर पश्चिम बंगाल में देखा गया है, जहां लगभग 89 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से करीब 27.1 लाख लोगों के पास अपील करने का पर्याप्त समय नहीं बचा है। 23 और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले यह स्थिति राजनीतिक और प्रशासनिक चिंता का विषय बन गई है, और मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज, विपक्ष ने उठाए सवाल
महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने राज्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात कर प्रक्रिया को 2002 की तर्ज पर लगभग 13 महीने तक चलाने की मांग की थी। उनका कहना है कि अधिकारियों ने भी इस संबंध में केंद्र को पत्र लिखकर जल्दबाजी न करने का अनुरोध किया है।
आयोग का पक्ष और आगे की स्थिति
हालांकि भारत निर्वाचन आयोग की ओर से इस मामले पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि कई राज्यों में डेटा मैपिंग का काम शुरू हो चुका है। इसके साथ ही आने वाले महीनों में जनगणना कार्य और चुनाव ड्यूटी के कारण संसाधनों पर दबाव बढ़ने की संभावना है, जिससे SIR प्रक्रिया की गति और प्रभावित हो सकती है।
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