
इन्दौर। कांग्रेस (Congress) की दो महिला मुस्लिम पार्षदों (Female Muslim Councilors) द्वारा वन्दे मातरम् (Vande Mataram_ नहीं गाने को लेकर मामला तूल पकड़ते जा रहा है। यह पहली बार नहीं है, जब कांग्रेस नेताओं की टिप्पणी चर्चा का विषय बनी हो। इसके पहले कमलनाथ (Kamal Nath) और जीतू पटवारी (Jitu Patwari) जैसे नेता की टिप्पणी चर्चा का विषय बन चुकी है। कमलनाथ ने जहां महिला नेत्री को टंच माल और आइटम कहा था तो पटवारी जिस पार्टी के अध्यक्ष हैं, उस पर पार्टी जाए तेल लेने जैसी टिप्पणी की थी, लेकिन दोनों ही नेताओं का कुछ नहीं हुआ। कल जब पटवारी से इस संबंध में प्रश्न किया तो बड़ी ही सफाई से उन्होंने इसको टाल दिया।
अब पार्टी की दोनों पार्षद विपक्ष के निशाने पर हैं। इसमें जहां फौेजिया शेख अलीम वंदे मातरम् नहीं गाने को लेकर चर्चा में आ चुकी हैं तो रूबीना इकबाल खान ने जिस पार्टी से चुनाव लड़ा, उसे ही पार्र्टी जाए भाड़ में कहकर अपनी भड़ास निकाली है। दोनों ही पार्षदों ने वंदे मातरम् गाने से सीधे-सीधे मना कर दिया, जबकि वंदे मातरम् हर आयोजन के पहले गाया जाता है। पार्षदों का कहना था कि यह किसी संविधान में नहीं लिखा है कि वंदे मातरम् जैसे राष्ट्रगीत को गाया जाए। यही नहीं रूबीना खान ने तो अपनी ही पार्टी के शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे के बारे में कह दिया कि वे कौन होते हंै, मुझे पार्टी से निकालने वाले? इसके बारे में फैसला प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी करेंगे। भाजपा ने इसे एक बड़ा मुद्दा बना लिया है और लगातार कांग्रेस पर हमले कर रही है। यह पहला मामला नहीं है, जब कांग्रेस नेताओं की टिप्पणी चर्चा का विषय बनी हो। पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एक भाजपा महिला नेत्री को लेकर ऐसी टिप्पणी की थी, जो सभ्य समाज में अनर्गल मानी जाती है। उन्होंने महिला नेत्री को टंच माल और आइटम करार दिया था। उस समय भी भाजपा ने इसे मुद्दा बनाया था और कमलनाथ जैसे नेता पर कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन कांग्रेस ने इस मामले में न तो कमलनाथ की अनुशासनहीनता मानी और न किसी नेता ने उनकी इस टिप्पणी पर आपत्ति ली। दूसरे नंबर पर जीतू पटवारी ने पार्टी गई तेल लेने कहकर उस पार्टी का अपमान किया था, जिसके आज वो अध्यक्ष बने हैं। कल प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान जीतू पटवारी से ये सवाल किया गया तो उन्होंने इसका जवाब नहीं दिया और टालमटोल करने लगे। चूंकि अब मामला पार्षदों का है और पटवारी लगातार कह रहे हैं कि अनुशासन समिति इस बारे में निर्णय लेगी कि दोनों पार्षदों का क्या करना है? हालांकि पहले ही एक पार्षद को खो चुकी कांग्रेस दो और पार्षदों को खोना नहीं चाहती है। यूं भी निगम में कांग्रेस पार्षदों की संख्या पहले ही कम है, ऐसे में दोनों पार्षदों को चेतावनी देकर छोड़ा जा सकता है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved