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इंदौर संभाग के 42 नगरीय निकायों में एक दिन छोडक़र बंट रहा है पानी, निगम ने रूकवाए भवनों के निर्माण भी

May 27, 2026

  • इंदौर सहित प्रदेश के 76 फीसदी शहरों में रोजाना जलप्रदाय नहीं, अब स्काडा सिस्टम से रियल टाइम मॉनिटरिंग का भी दावा

इंदौर। पूरे प्रदेश में ही इन दिनों जलसंकट को लेकर हाहाकार मचा है। इंदौर संभाग के 55 में से 42 नगरीय निकाय ऐसे हैं जहां एक दिन छोडक़र पानी दिया जा रहा है, तो 8 निकायों में दो दिन छोडक़र जलप्रदाय हो रहा है। नगरीय प्रशासन और विकास विभाग की रिपोर्ट से ही जल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। कांग्रेस द्वारा कल भी जलसंकट को लेकर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में राजवाड़ा पर बड़ा प्रदर्शन किया। रैली निकालकर निगम दफ्तर पहुंचकर मटके फोड़े और महापौर सहित भाजपा के जनप्रतिनिधियों को नकारा बताया। वहीं नगर निगम ने कई भवनों के निर्माण कार्य भी रूकवा दिए। आयुक्त के निर्देश पर अधिकारियों ने 21 भवनों में काम बंद करवाया और सभी को निर्देश दिए कि भवन निर्माण में सिर्फ ट्रीटेड यानी उपचारित जल का ही उपयोग किया जाए। अगर अन्य पानी का उपयोग पायागया को निर्माण नहीं होने दिया जाएगा।

शहर के जलसंकट के मद्देनजर जल संरक्षण और भू-जल दोहन रोकने के लिए निर्माण कार्यों में ट्रीटेड वॉटर अनिवार्य किया गया है। आयुक्त क्षितिज सिंघल के मुताबिक, सभी निर्माणाधीन भवनों-कॉलोनियों में जांच कराई जा रही है और अगर ट्रीटेड वॉटर नहीं पाया गया तो निर्माण कार्य रोका जाएगा। इसी क्रम में कल नगर निगम के भवन अधिकारियों द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित निर्माणाधीन भवनों एवं परियोजनाओं का व्यापक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान निर्माणाधीन भवनों की जांच की गई, जिनमें ट्रीटेड वाटर के उपयोग की स्थिति का परीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कई निर्माण स्थलों पर अब भी ट्रीटेड वाटर का उपयोग नहीं किया जा रहा था।


  • इस पर निगम द्वारा संबंधित भवन संचालकों एवं निर्माण एजेंसियों को नोटिस जारी करते हुए तत्काल नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए। कार्यवाही के परिणामस्वरूप 30 निर्माणाधीन भवनों द्वारा निर्धारित शुल्क जमा करवाकर तत्काल ट्रीटेड वाटर का उपयोग प्रारंभ कर दिया गया। वहीं, 21 निर्माणाधीन भवनों में ट्रीटेड वाटर का उपयोग नहीं पाए जाने पर निगम द्वारा सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित निर्माण कार्यों को तत्काल प्रभाव से बंद करवाया गया। निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नियमों की अनदेखी करने वाले निर्माणकर्ताओं के विरुद्ध आगे भी कठोर कार्यवाही जारी रहेगी। आयुक्त क्षितिज सिंघल ने कहा कि शहर में जल संरक्षण को बढ़ावा देने तथा पेयजल स्रोतों पर दबाव कम करने के उद्देश्य से निर्माण कार्यों में ट्रीटेड वाटर का उपयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी निर्माण एजेंसियों, बिल्डर्स एवं कॉलोनाइजऱों से अपील की है कि वे निगम के निर्देशों का पालन करते हुए निर्माण कार्यों में अनिवार्य रूप से ट्रीटेड वाटर का उपयोग करें, ताकि जल संरक्षण के प्रयासों को मजबूती मिल सके। आयुक्त श्री सिंघल द्वारा समस्त भवन अधिकारी एवं अन्य अधिकारियों को निर्देशित किया कि कोई भवन निर्माणकर्ता या अन्य निर्माण कार्य के दौरान ट्रीटेड वाटर की मांग करता है तो उसको पूर्ण सहयोग करते हुए नियमानुसार शुल्क जमा कर ट्रीटेड वाटर हाइड्रेंट से ट्रीटेड वाटर उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित करें।

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