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इन्दौर खतरा, अधूरे रनवे पर उतर रहे विमान

April 13, 2026

  • 1100 मीटर रनवे का काम अधूरा, रनवे ऊंचा-नीचे होने से विमानों को लग रहे झटके, कभी भी हो सकता है हादसा
  • एयरपोर्ट को 24 घंटे खोलने की जल्दबाजी में काम बीच में बंद करवाया

इंदौर, विकाससिंह राठौर। इंदौर के देवी अहिल्याबाई होलकर विमानतल पर यात्रियों की जान खतरे में है। यहां रनवे रीकार्पेटिंग के काम को अधूरा ही बंद कर दिया गया है, जिसके कारण अब अधूरे रनवे पर ही विमान उतर और उड़ रहे हैं। 1100 मीटर, यानी एक किलोमीटर से ज्यादा हिस्से में रनवे पर डामर की एक परत ही नहीं बिछाई गई है। इसके कारण रनवे की सतह ऊंची-नीची है, जिससे इस पर दौड़ते हुए विमानों को झटके लग रहे हैं। इस लापरवाही के कारण एयरपोर्ट पर कभी भी बड़ा हादसा भी हो सकता है।

उल्लेखनीय है कि इंदौर एयरपोर्ट के रनवे पर गड्ढे होने के कारण नवंबर 2024 से इस पर रीकॉर्पेटिंग का काम शुरू किया गया था। इसके लिए रनवे पर रोज रात 10.30 बजे से सुबह 6.30 बजे के बीच विमानों के संचालन पर रोक लगाकर काम किया जा रहा था। इस काम को अक्टूबर 2025 तक पूरा होना था, लेकिन समय पर काम पूरा न हो पाने के कारण पहले दिसंबर 2025 और फिर 31 मार्च 2026 तक का समय बढ़ाया गया। उम्मीद थी कि इस दौरान काम पूरा हो जाएगा, लेकिन 31 मार्च तक भी काम पूरा नहीं हो पाया। इसे देखते हुए संभावना जताई जा रही थी कि फिर अतिरिक्त समय लिया जाएगा, लेकिन विमानतल प्रबंधन ने अधूरे काम को ही बंद करवाते हुए 29 मार्च से ही एयरपोर्ट को 24 घंटे खोल दिया। इसके कारण अब बचा हुआ काम नहीं हो पा रहा है और उड़ानों का संचालन अधूरे रनवे पर ही हो रहा है।


  • 00 मीटर पर नहीं चढ़ी दूसरी परत
    अग्निबाण ने जब पूरे मामले की पड़ताल की तो सामने आया कि इंदौर एयरपोर्ट के 2754 मीटर लंबे रनवे पर रीकॉर्पेटिंग के काम के तहत डामर की दो परतें बिछाई जाना थीं। पहली परत तो बिछ चुकी थी और दूसरी परत बिछाने का काम चल रहा था। 28 मार्च 2026 तक 2754 मीटर में से करीब 1660 मीटर तक दूसरी परत बिछाने का काम पूरा हो पाया, वहीं एरोड्रम थाने की ओर से करीब 1100 मीटर हिस्से में दूसरी परत बिछाई ही नहीं गई। इसके कारण तेज गति में उड़ता या उतरता विमान अचानक सतह ऊंची-नीची होने के कारण असंतुलित भी हो सकता है।

    उपलब्धियां गिनवाने में किया सुरक्षा से समझौता
    29 मार्च को केंद्रीय उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने इंदौर सहित देश के कई एयरपोट्र्स पर अलग-अलग सुविधाओं का वर्चुअली उद्घाटन किया था। इसमें इंदौर एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 के साथ ही उड़ान यात्री कैफे सहित कुछ अन्य सुविधाएं शामिल थीं। इस समारोह में उपलब्धियों के लिए एयरपोर्ट खोल दिया गया, जबकि इस तरह के मामलों में काम पूरा होने के बाद एयरपोर्ट खोलने से पहले डीजीसीए सिक्योरिटी ऑडिट कराकर मंजूरी देता है।

    विमान उतरने के 700 मीटर बाद लगता है झटका
    एविएशन एक्सपट्र्स के मुताबिक एरोड्रम थाने की ओर से शुरू होने वाले रनवे के छोर, जिसे 25 कहा जाता है, से 1100 मीटर तक दूसरी परत नहीं बिछाई गई है। इस ओर से उतरने वाले विमान करीब 400 मीटर बाद रनवे पर पिछले पहियों से उतरते हैं। इसके करीब 100 मीटर बाद अगला पहिया भी रनवे पर आ जाता है। इसके करीब 600 मीटर बाद वो स्थान आता है, जहां रनवे की दूसरी परत पर विमान चढ़ता है। दोनों परतों में ऊंचाई का अंतर होने के कारण स्लोप होने के बाद भी तेज रफ्तार के कारण विमान को झटका लगता है। कई यात्री इस तरह की शिकायत भी कर चुके हैं।

    9 मार्च को उखड़ गया था रनवे
    रनवे रीकॉर्पेटिंग कार्य के दौरान 9 मार्च को काम पूरा होने के बाद दिन में जब उड़ानों का संचालन शुरू हुआ तो रनवे का कुछ हिस्सा उखड़ गया था। इसके कारण करीब 20 मिनट के लिए रनवे को बंद कर दिया गया था। इस दौरान दिल्ली और रायपुर से आई इंडिगो की दो उड़ानों को डाइवर्ट कर भोपाल भेजना पड़ा था।

    फिर रात को बंद होगा एयरपोर्ट
    एक्सपट्र्स के अनुसार रनवे का जो काम अधूरा है उसे पूरा करने के लिए एक बार फिर रात को रनवे को बंद रखना पड़ेगा। इसके लिए समर शेड्यूल में रात की जो दो उड़ानें मिली हैं, उन्हें भी बंद करना या समय बदलना पड़ सकता है। संभावना है कि बचा काम पूरा करने में करीब दो माह का समय लग सकता है। ऐसे में इंदौर एयरपोर्ट जल्द ही एक बार फिर रात को बंद नजर आ सकता है।

    सही जानकारी भी छुपाता रहा प्रबंधन
    विमानतल प्रबंधन ने मार्च की शुरुआत में ही घोषणा कर दी थी कि 31 मार्च तक रनवे रीकॉर्पेटिंग का काम पूरा कर लिया जाएगा। आखिरी समय आने पर जब मीडिया ने सवाल किए तो गलत जानकारी देते हुए बताया गया कि 500 मीटर से भी कम हिस्से में काम बाकी है और वो भी वह हिस्सा है, जिसका उपयोग विमानों की आवाजाही में नहीं होता है।

    उड़ानों को कोई खतरा नहीं, बचा काम जल्द पूरा करेंगे
    यह सही है कि रनवे की सेकंड लेयर का कुछ काम बाकी है। इसे जल्द ही पूरा करने की योजना है। युद्ध के कारण बिटूमिन (डामर) की कमी होने से भी काम समय पर पूरा नहीं हो पाया, लेकिन अभी इसके कारण उड़ानों के संचालन में कोई परेशानी या खतरा नहीं है। उड़ानों का संचालन मुख्यालय से मिले निर्देशों और नियमों के आधार पर ही किया जा रहा है।
    – सुनील मग्गीरवार, इंदौर एयरपोर्ट डायरेक्टर

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