
सिरपुर, पीपल्यापाला, बिलावली, लिम्बोदी सहित सभी प्रमुख तालाबों का जल स्तर आधे से भी कम हुआ कुछ तो पूरे ही सूखे, यशवंत सागर से भी पानी मिलना हुआ कम
इंदौर। भीषण गर्मी (Scorching Heat) के चलते जल स्त्रोतों (Water sources) में वाश्पीकरण (Evaporation) के चलते तेजी से पानी घटने लगा। जिले के सभी प्रमुख तालाबों (Ponds) का जल स्तर भी आधे से कम रह गया और एक अनुमान के मुताबिक लिम्बोदी, सिरपुर, पिपलियापाला, बिलावली सहित यशवंत सागर का लगभग सवा करोड़ लीटर पानी गायब हो गया। वैसे हर साल गर्मियों में जल स्तर घट जाता है और वाश्पीकरण के चलते पानी ही बारिश के रूप में बरसता है। निगम सिर्फ यशवंत सागर से ही रोजाना जल वितरण के लिए पानी लेता है। अभी हालांकि उसकी क्षमता भी घट गई है। इस बार अधिकतम तापमान जहां 43-44 डिग्री तक दर्ज होता रहा, वहीं पहली बार बड़ी संख्या में बोरिंग सूखे। नतीजतन शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक अत्यधिक जलसंकट का सामना करना पड़ रहा है।
700 से ज्यादा टैंकर निगम के पानी बांटने में जुटे हैं। इससे कई गुना ज्यादा निजी टैंकरों का पानी इंदौर की आधी से ज्यादा आबादी को खरीदकर पीना पड़ रहा है। निगम में शामिल 29 गांवों में ही बीते वर्षों में सबसे अधिक कॉलोनियां, टाउनशिप, बहुमंजिला बिल्डिंगें और अन्य निर्माण बड़ी संख्या में हुए हैं और इन क्षेत्रों में चूंकि नर्र्मदा की लाइनें नहीं डली और ना ही टंकियां बन सकी, जिसके चलते बोरिंग और अभी टैंकरों से काम चलाना पड़ रहा है। पानी बांटने वाले टैंकरों ने भी मनमानी करते हुए दाम दो से लेकर चार गुना तक बढ़ा दिए हैं। दरअसल, यह पहला मौका है जब पानी के टैंकरों को भरने वाले बोरिंग भी सूखने लगे हैं। दूसरी तरफ यशवंत सागर की जल संग्रहण क्षमता साढ़े 19 फीट की है, जिसमें अभी 9 से 10 फीट पानी ही बचा है। नतीजतन इंदौर निगम भी यशवंत सागर से जुड़े क्षेत्रों में जलप्रदाय के लिए जो पानी लेता है उसकी मात्रा भी घटकर आधी रह गई है। सिर्फ यशवंत सागर के पानी का ही जलप्रदाय में इस्तेमाल होता है। शेष तालाबों के पानी से आसपास के क्षेत्रों का जल स्तर बढ़ता है। पिछले दिनों अग्रिबाण ने यह भी खुलासा किया था कि इंदौर के कई प्रमुख तालाब या तो सूख गए अथवा तेजी से गायब होने लगे हैं, जिन पर कॉलोनियों से लेकर अन्य निर्माण हो चुके हैं। अब हालांकि प्रशासन और निगम तालाबों के कैचमेंट एरिया को मुक्त कराने में भी जुटा है और कुछ अवैध निर्माण तोड़े भी गए हैं। दूसरी तरफ सिरपुर तालाब भी आधे से अधिक सूख चुका है, तो बिलावली तालाब में मात्र 25 फीसदी पानी भी नहीं बचा है। पिपलियापाला सहित अन्य तालाबों की भी यही स्थिति है। लिम्बोदी तो पूरा ह ी सूख गया है। अभी हालांकि जलगंगा संवर्धन अभियान जैसे जनभागीदारी वाले कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं, जिसमें तालाबों से गाद निकालने, उनके गहरीकरण से लेकर अतिक्रमण हटाने सहित कई कार्य किए जा रहे हैं। दूसरी तरफ एक अनुमान के मुताबिक सवा करोड़ लीटर से ज्यादा पानी भीषण गर्मी के चलते इन तालाबों का गायब यानी वाश्पीकरण के चलते उड़ गया।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved