
इन नेताओं का मेरे अंगने में क्या काम?
मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है…? ये गा रही हैं विधायक मालिनी गौड़ (MLA Malini Gaud)। गौड़ नेे प्रशिक्षण वर्ग के दौरान अपने क्षेत्र में आने वाले वक्ताओं की सूची खुद तैयार कर ली और पार्टी से स्पष्ट कह डाला कि ये नेता मुझे नहीं चाहिए। बताने वाले बता रहे हैं कि इनमें महापौर पुष्यमित्र भार्गव (Mayor Pushyamitra Bhargav) का नाम सबसे ऊपर था। भार्गव से गौड़ की पटती नहीं है और उन्होंने स्पष्ट कह दिया कि महापौर के साथ-साथ अनंत पंवार, बाबूसिंह रघुवंशी, अशोक अधिकारी और संतोष मेहता किसी कीमत पर नहीं चाहिए। ताबड़तोड़ पाटी ने इनके स्थान पर दूसरे नेताओं के नाम तय किए और चार नंबर में होने वाले वर्ग में भेजा। इनमें जीतू जिराती, शंकर लालवानी, सुमित मिश्रा, राकेश डागुर, दिनेश सोनगरा, गौरव रणदिवे, प्रताप करोसिया, सुदर्शन गुप्ता, आलोक दुबे, अंजू माखीजा, सुधा सुखानी, दीपक बागवान जैसे नाम शामिल थे।
जब महिला पार्षद को नहीं मिला मंच
प्रधानमंत्री मोदी के महिला आरक्षण बिल को लेकर प्रेस कांफ्रेंस रखी थी। मामला महिलाओं के सामाजिक संगठन का था, इसलिए मंच पर उन्हें ही बिठाया गया, लेकिन एक महिला पार्षद उस समय गुस्से से लाल हो गई, जब मंच पर विधायक मालिनी गौड़ के साथ अंजू माखीजा और महिला मोर्चा अध्यक्ष शैलजा मिश्रा को देखा। उन्हें लगा कि उनकी शान में गुस्ताखी हो गई है। तब वे तुरंत वहां खड़े होकर भाजपा नेताओं के पास पहुंची और अपना नाम नहीं होने पर नाराजगी जाहिर की, लेकिन नेताओं ने साफ कह दिया कि नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने यह व्यवस्था की है। आप उनसे संपर्क करो। अब पार्षद क्या करती चुपचाप सामने की कुर्सी पर बैठ गई।
निष्क्रिय है कांग्रेस के विभागाध्यक्ष
कांग्रेस की शहर कार्यकारिणी की घोषणा हो गई है, लेकिन अभी तक विभाग अध्यक्षों की घोषणा नहीं हुई है। इस कारण सभी विभाग अध्यक्ष निष्क्रिय पड़े हुए हैं। महिला कांग्रेस, पिछड़ा वर्ग ्रकांग्रेस, अजा और अजजा कांग्रेस के साथ-साथ अन्य विभाग खाली पड़े हैं। इन पर उचित नाम नहीं मिल पा रहे हैं। चिंटू चौकसे से भी नाम मांगे गए हैं, लेकिन वे भी अभी तक नाम नहीं दे पाए हैं। प्रदेश से भी संज्ञान लेकर नामों की घोषणा नहीं हो पा रही है। हालांकि बार-बार कहा जा रहा है कि जल्द ही अध्यक्षों की घोषणा होगी, लेकिन कब होगी, इसका जवाब पार्टी के पास नहीं है और इसी चक्कर में सारे काम रुके हुए हैं।
कोई भी विधायक और सांसद जीतकर बताए
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की विधानसभा में एक साधु ने ऐसा बयान दे डाला, जिसने भाजपा की राजनीति में हलचल मचा दी। भेरूंदा के पास सातदेव में एक धार्मिक आयोजन था, जिसमें बड़ी संख्या में विधानसभा के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आम लोग भी मौजूद रहे। यहां महाराष्ट्र से आए एक संत भी मौजूद थे। नर्मदा नदी का 11 हजार लीटर दूध से अभिषेक किया गया, लेकिन माहौल उस समय गरमा गया, जब संत ने नेताओं पर अभद्र टिप्पणी करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि यहां से न कांग्रेस और न भाजपा का विधायक और सांसद जितेगा। अगर जीत गया तो आधी मूंछ कटवा दूंगा। बताया जा रहा है कि संत का नाम शिवानंद है और वे लगातार नर्मदा परिक्रमा करते रहते हैं।
गायब हो गए मुस्लिम नेता
कांग्रेस की महिला पार्षदों द्वारा वन्दे मातरम् नहीं गाने को लेकर की गई बयानबाजी से भाजपा को बैठे-बिठाए मुद्दा मिल गया। कोशिश की गई कि मुस्लिमों से ही इसका विरोध करवाया जाए और अल्पसंख्यक मोर्चा से वन्दे मातरम् गंवाया जाए। मौका भी मिल गया, लेकिन सुमित मिश्रा ने जिस मुस्लिम नेता को विरोध करने का बोला उन्होंने अनमने से हां तो भर दी, लेकिन जब प्रदर्शन की बारी आई तो वे गायब हो गए और प्रदर्शन धरा रह गया। अल्पसंख्यक मोर्चा भी सामने नहीं आया और नगर अध्यक्ष के अरमान ठंडे के ठंडे रह गए।
विरोधियों को मिला मौका
वन्दे मातरम् गीत को लेकर हंगामा क्या मचा कि विरोधियों को मौका मिल गया। सोशल मीडिया पर विधायक मालिनी गौड़ का एक वीडियो दौड़ पड़ा, जिसमें बताया गया कि उन्हें राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत में फर्क नहीं मालूम। उन्होंने जनगणमन को राष्ट्रीय गीत बता डाला। बस फिर क्या था मेडम के इस बयान की नुक्ताचीनी होने लगी। समर्थक भी सक्रिय हो गए और उन्होंने बताया कि ये वीडियो आज का नहीं, बल्कि 6-7 साल पुराना है। अब देखना है कि मेडम को राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान में मतलब समझ आया या नहीं?
वंदे मातरम् से किया डेमेज कंट्रोल
चिंटू चौकसे जैसे तेजतर्रार कांग्रेस के अध्यक्ष ने आव देखा न ताव, फौरन ही कांग्रेस के कार्यक्रमों और बैठकों के पहले वंदे मातरम् अनिवार्य कर दिया और फरमान सुना दिया कि जिसने भी गड़बड़ की, उसकी खैर नहीं। चौकसे के इस डेमेज कंट्रोल की सब जगह तारीफ हो रही है। चिंटू अगर एक्शन नहीं लेते तो बात उलटी हो जाती और उनकी बदनामी हो जाती, साथ ही चिंटू ने एक तीर से दो निशाने भी साध दिए। फौजिया से पुरानी वाली अदावत का बदला भी ले लिया। रूबीना से भी दो-दो हाथ कर लिए, जिसमें रूबीना ने कहा था कि चिंटू चौकसे मुझे पार्टी से निकालने वाले कौन होते हैं? कुछ भी हो चिंटू ने दोनों महिला पार्षदों को ऐसा सबक दिया है कि वे आगे से अनर्गल बयानबाजी से बचेंगी। हालांकि रूबीना कल माफी मांग चुकी है, लेकिन गेंद रूबीना के पाले से निकल गई है।
वंदे मातरम् के बहाने शहर के कई मुद्दे ठंडे हो गए और यह भाजपा भी चाहती थी। सबसे बड़ा मुद्दा भागीरथपुरा में गंदे पानी से मौत रहा है और फिर बिना काम बिल पास होना भी एक बड़ा कारण है, जिसके कारण नगर निगम की बदनामी हो रही है। भाजपाई खुश हैं कि रूबीना और फौजिया ने कम से कम मुद्दों से ध्यान तो भटकाया। -संजीव मालवीय
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