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बाबूजी की निष्ठा का परिणाम है अग्निबाण

May 23, 2026

अग्निबाण पढक़र लाखों पाठकों को चैन व राहत मिलती है, ये बहुत बड़ी कमाई…

बाबूजी एक कर्मयोद्धा के रूप में अग्निबाण को जन-जन तक पहुंचाने के सपने के साथ आगे बढऩे का प्रयास करते पूरे नगर एवं उस समय बेहद कम आबादी वाले इंदौर की जनता से लेकर नेता तक देखकर आश्चर्य में पड़ जाते थे। जिस प्रकार बाबूजी अखबार को निकालने के लिए हर दिन किला लड़ाते थे, अंजाम की परवाह नहीं करते थे। वो संकटों के बावजूद अखबार को चलाते रहे। यदि वो कड़े संघर्ष की राह पर ना चलते और हार मान लेते तो आज जो अग्निबाण पूरे प्रदेश में छाया हुआ है, ये सब कुछ देखने को नहीं मिलता।


  • पूज्य बाबूजी पैसा-पैसा जोडक़र मु_ीभर कर्मचारियों को समय पर मेहनताना देते थे, उनके दिल में ईमानदारी भरी हुई थी, कर्मचारी को परिवार का हिस्सा मानते थे, वो समझते थे कि किसी भी संस्थान की बुनियाद कर्मचारियों पर टिकी होती है। कर्मचारी का शोषण नहीं होगा तो वह खुश रहेगा। खुशमिजाज और ईमानदार कर्मचारी जिस संस्थान में होते हैं, वो संस्थान आशानुरूप सफलता हासिल करता है। अग्निबाण के साथ भी यही हुआ। आज अग्निबाण अद्र्धशताब्दी यानी आधी सेंचुरी मारने जा रहा है। 50वें वर्ष में धूमधाम से प्रवेश हो रहा है। ये अद्र्धशताब्दी धमाकेदार, तेज गति से पूरे प्रदेश मेंं नाम कमाने की रही हैं। इंदौर यदि स्वच्छता से लेकर प्रदेश की औद्योगिक राजधानी के रूप में पहचान बनाता है तो अग्निबाण ने देश में सबसे अधिक प्रसार संख्या का जो झंडा गाड़ा, ये भी इस शहर के लिए बड़ा खिताब हैं। आज अग्निबाण से जुड़े सैकड़ों परिवारजनों के लिए नाम, शोहरत व जीविका का साधन भी बना हुआ हैं। शहर को उस समय बाबूजी ने असंभव सी सौगात दी, जो संभव में बदलती गई। इतनी बड़ी प्रसार संख्या बनाना और उसे सालों तक कायम रखना चुनौतीपूर्ण काम है। ऐसे दौर में, जबकि सोशल मीडिया पल-पल की खबरें दे रहा है, लेकिन सच के रूप में सामने आने वाले अग्निबाण को पढऩे के बाद ही हजारों-लाखों पाठकों को चैन व राहत मिलती है, ये बहुत बड़ी कमाई है। इस कमाई को बाबूजी की सोच व नीतियों के कारण पाना संभव हुआ है। आज संस्थान के जनक व कर्मयोद्धा बाबूजी का जन्मदिवस भी है… उनका वो जुझारू मिजाज, सुबह से रात तक केवल कर्म मार्ग पर चलने की आदत संस्थान के हर कर्मचारी के लिए सीख है। इस सीख को सदा जिन्दा रखना होगा। उस जमाने में तंगहाल बाबूजी खुशहाल नजर आते थे। उस दौर में बाबूजी घबराए नहीं, कठोर निर्णय, उस पर अडिग रहना, नेक इरादे,कुछ नया शहर को देने की सोच का परिणाम है अग्निबाण… -मदन सवार

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